UP: कर्मचारियों और अधिकारियों की नहीं उतरी होली की खुमारी

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बदायूं, अमृत विचार। होली पर चार दिन के अवकाश के बाद भी गुरुवार को जब सरकारी कार्यालय खुले तो अधिकारी-कर्मचारी सुबह साढ़े 10 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचे थे। जबकि फरियादी सुबह 10 बजे से ही अधिकारियों की राह देखते नजर आए। कलेक्ट्रेट सहित विकास भवन स्थिति विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की कुर्सियां खाली दिखाई दीं। ऐसे समझा जा सकता है कि अधिकारी आम जनता के कार्यों के प्रति कितने जिम्मेदार हैं।

होली के त्योहार के मद्देनजर कई दिन से चलते अवकाश के बाद जब गुरुवार को सरकारी दफ्तर खुले तो दफ्तरों से कर्मचारी और अधिकारी गायब मिले। होली की छुट्टियों के बाद सुबह 10 बजे विकास भवन पहुंचकर पड़ताल की तो पता चला कि अधिकांश विभागों में कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं। सुबह 10 बजे तक एक दो कर्मचारी ही दिखाई दिए। परियोजना निदेशक विभाग में पीडी सहित अन्य कर्मचारियों की कुर्सियां खाली थीं। ऐसा ही हाल समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग, जिला विकास विभाग, एनआरएलएम, सहकारिता, पशुपालन विभाग का रहा। जिला पंचायती राज विभाग में भी न कर्मचारी उपस्थित थे और न ही डीपीआरओ। कृषि विभाग में भी अधिकारी अनुपस्थित रहे। 

इस विभाग में एक दो कर्मचारियों को छोड़कर अधिकारी कर्मचारी दिखाई नहीं दिए। साढ़े दस बजे के बाद कर्मचारियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ। पशुपालन विभाग और समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी तो पौने 11 बजे आते हुए दिखाई दिए। इस दौरान विकास भवन में कई फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे थे। गांव उदमई निवासी बुजुर्ग महिला सियादेवी अपनी पेंशन की समस्या को लेकर विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग में पहुंची थीं। लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति में वह इंतजार करते हुए दिखाई दी। गांव बीबीपुर निवासी रामसरन आवारा पशुओं द्वारा किए जा रहे नुकसान के चलते उन्हें पकड़वाने की मांग करने पशुपालन विभाग पहुंचे थे। लेकिन अधिकारी और कर्मचारियों के न पहुंचने पर उन्हें वापस लौटना पड़ा। ऐसे कई और अन्य लोग भी अपनी समस्याओं के समाधान को पहुंचे। लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

जिला विकास अधिकारी अखिलेश चौबे ने बताया कि अधिकांश अधिकारी कर्मचारी दूसरे जनपद के निवासी हैं। घर से लौटने के दौरान देर होना स्वाभाविक है। अन्य दिनों में वैसे भी कर्मचारी समय पर ऑफिस आते हैं और देर शाम तक रुक कर कार्य निपटाते हैं। आने में 15 - 20 मिनट की देरी हो ही जाती है।

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