Moradabaad : स्कूल का जर्जर भवन बन रहा छात्रों की जान पर आफत
सरकारी स्कूलों को कान्वेंट की तर्ज पर विकसित करने के दावे हवा-हवाई, कई स्कूल भवन खस्ता हाल
मुरादाबाद, अमृत विचार। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर सुविधा देने का सरकारी फरमान कागजों में दम तोड़ रहा है। महानगर के कई स्कूलों के साथ ही दूरस्थ क्षेत्र के ग्रामीण स्कूलों की हालत और भी खस्ता है। मुख्यमंत्री के आगामी भ्रमण कार्यक्रमों में सरकारी स्कूलों के भवनों की स्थिति, छात्रों की उपस्थिति, शिक्षकों की संख्या देखे जाने को लेकर विभाग के उच्चाधिकारी के आदेश के बाद भी जिले में शिक्षाधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। यह स्थिति बिलारी ब्लॉक के एक स्कूल मात्र की नहीं है। कई स्कूलों की हालत जर्जर है।
बिलारी ब्लॉक के अन्तर्गत प्राथमिक स्कूल भिंडवारी (अंग्रेजी माध्यम) के भवन की स्थिति जर्जर है। पांच कमरों के इस स्कूल में एक कमरा लगभग दो दशक से इतना जर्जर है कि इसके सीलिंग का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ गया है। दीवारों के ईंटें प्लास्टर गिरे प्लास्टर के झरोखे से बदहाली को निहार रहे हैं। इस स्कूल में वर्तमान में 130 छात्र नामांकित हैं। जबकि नामांकन बढ़ने पर यह संख्या 150 के आसपास पहुंच जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में यह अंग्रेजी माध्यम के इस सरकारी स्कूल की बदहाली से बच्चों की शिक्षा पर संकट खड़ा हो रहा है। 15 वर्षों से खस्ताहाल इस कमरे की सुध लेने की जहमत किसी शिक्षाधिकारी ने नहीं उठाई। स्कूल बिलारी-सिरसी मुख्य मार्ग पर स्थिति होने के चलते बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अधिकतर समय स्कूल का गेट बंद रखना शिक्षकों की लाचारी है। इस स्कूल में प्रधानाध्यापक सहित 6 शिक्षक हैं। लेकिन फिर भी यहां संसाधन को ठीक करने में विभाग की रूचि नहीं दिख रही है।
प्राथमिक स्कूल भिंडवारी (अंग्रेजी माध्यम) के प्रधानाध्यापक विशाल यादव का कहना है कि स्कूल के इस जर्जर कमरे का उपयोग छात्रों की पढ़ाई में नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि 2010 से वह इस दूरस्थ विद्यालय में तैनात हैं। स्कूल के इस जर्जर कमरे को ठीक कराने के लिए उन्होंने ब्लॉक के पूर्व खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से उच्चाधिकारियों को भी पत्र लिखकर आग्रह किया। लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।
