Moradabad: डेटा आधारित रणनीति से बदलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। स्वास्थ्य विभाग ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए डेटा को सार्वजनिक स्वास्थ्य संपत्ति के रूप में विकसित करने की रणनीति अपनाई है। इस पहल के तहत स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का वैज्ञानिक, सुरक्षित और व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे नीतिगत निर्णयों से लेकर जमीनी स्तर तक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।

जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संकलित किया जाएगा। इससे बीमारियों की प्रवृत्ति, उपचार की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का सटीक विश्लेषण संभव होगा। विभाग के अधिकारियों के अनुसार डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और जरूरतमंद क्षेत्रों की पहचान समय रहते की जा सकेगी।

चिकित्साधिकारियों के अनुसार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, संक्रामक रोग नियंत्रण और गैर-संचारी रोगों जैसी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डेटा की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आंकड़ों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर लापरवाही या असमानता न रहे। इस रणनीति के अंतर्गत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। केवल अधिकृत अधिकारियों को ही आंकड़ों तक पहुंच दी जाएगी, ताकि व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग न हो।

डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव का कहना है कि डेटा आधारित प्रणाली से स्वास्थ्य विभाग भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों का पूर्वानुमान लगाने में भी सक्षम होगा, जिससे आपातस्थितियों में त्वरित और सटीक निर्णय लिए जा सकेंगे। यदि डेटा का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो योजनाओं की निगरानी, रोगों की पहचान और उपचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति के तहत स्वास्थ्य कर्मियों को डेटा संग्रह और विश्लेषण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। चिकित्सक, नर्स, एएनएम, आशा कार्यकर्ता और डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रशिक्षण में शामिल होंगे। प्रशिक्षण में सही डेटा एंट्री, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और रिपोर्टिंग पर जोर रहेगा। इससे जमीनी स्तर से प्राप्त आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा। डेटा आधारित निगरानी से रोग पहचान और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

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