एफटीए से भारतीय कपड़ा, मसाले, गहने-जेवरातों को यूरोपीय संघ में मिलेगा शुल्क मुक्त प्रवेश

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार संधि (एफटीए) के तहत 97 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ईयू के देशों में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश मिलेगा, जिनमें भारतीय कपड़ा, मसाले, गहने-जेवरातों और कुछ समुद्री उत्पादों पर शून्य सीमा शुल्क का भी प्रावधान है। 

दोनों पक्षों ने मंगलवार को एफटीए को अंतिम रूप की घोषणा की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने एफटीए के तथ्य साझा करते हुए बताया कि देश के कुल निर्यात मूल्य में 99.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी वाले 97 प्रतिशत भारतीय सामानों को प्राथमिकता के आधार पर यूरोपीय संघ में प्रवेश मिलेगा। 

उसने बताया कि कपड़ा, चमड़े के उत्पादों और जूते-चप्पलों, चाय, कॉफी, मसालों, खेल के सामान, खिलौनों, गहने-जेवरात और कुछ समुद्री उत्पादों समेत कुल 70.4 प्रतिशत भारतीय वस्तुओं पर ईयू में शून्य सीमा शुल्क लगेगा। अन्य 20.3 प्रतिशत वस्तुओं पर अगले तीन से पांच साल के दौरान शुल्क शून्य कर दिया जायेगा।

 इस सूची में कुछ समुद्री उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और हथियार एवं गोला-बारूद शामिल हैं। वहीं, 6.1 प्रतिशत वस्तुओं पर आयात शुल्क कम किये जायेंगे। इनमें चुनिंदा पॉल्ट्री उत्पाद, संरक्षित सब्जियां और बेकरी उत्पाद शामिल हैं। कारों, इस्पात, कुछ श्रृंप और प्रॉन पर कोटा आधारित शुल्क लगाया जायेगा यानी एक निश्चित सीमा तक कर की दर कम होगी, जबकि उस सीमा के बाद आयात शुल्क बढ़ जायेगा। 

मंत्रालय ने बताया कि कपड़ा, सिले-सिलाये वस्त्र, समुद्री, चर्म, रासायनिक, प्लास्टिक/ रबड़, खेल के सामान, खिलौने, कीमती पत्थर और गहनों के निर्यात पर शून्य सीमा शुल्क लगेगा। ये सभी श्रम साध्य सेक्टर हैं और भारत 33 अरब डॉलर की इन वस्तुओं का निर्यात करता है। बदले में भारत यूरोपीय संघ को उसकी 92.1 प्रतिशत वस्तुओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश देगा। 

उसके 49.6 प्रतिशत उत्पादों पर एफटीए के प्रभाव में आते ही सीमा शुल्क शून्य हो जायेगा। अन्य 39.5 प्रतिशत वस्तुओं पर पांच, सात और 10 साल में चरणबद्ध तरीके से शुल्क शून्य किया जायेगा। तीन प्रतिशत उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से आयात शुल्क कम किया जायेगा। इनमें सेब, नाशपाति, आड़ू और किवी पर एक सीमा तक कम शुल्क लगेगा और उसके बाद शुल्क बढ़ जायेगा। 

मंत्रालय ने कहा है कि ईयू से उच्च प्रौद्योगिकी वाले सामान का आयात सस्ता होने से भारतीय कंपनियों को इनकी खरीद के लिए ज्यादा विकल्प मिल सकेंगे। चाय, कॉफी, मसालों, अंगूर, खीरा, सूखे प्याज, ताजी सब्जियां और फलों के साथ प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए प्राथमिकता के आधार पर बाजार उपलब्ध होने से देश के किसानों को लाभ मिलेगा। 

भारत ने इस समझौते से डेयरी, अनाज, पॉल्ट्री, सोयमील, चुनींदा फलों और सब्जियों जैसे अपने संवेदनशील उत्पादों को बाहर रखा है। एफटीए में यह सुनिश्चित किया गया है कि सिर्फ पर्याप्त रूप से प्रसंस्कृत या विनिर्मित उत्पादों को ही इसका लाभ मिल सके। एफटीए के तहत ईयू से 144 सेवा उपक्षेत्रों के लिए गंभीर प्रतिबद्धता सुनिश्चित की गयी है। इनमें आईटी/ आईटीईएस, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा और अन्य व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं। 

भारत 102 उपक्षेत्रों को प्राथमिकता प्रदान करेगा, जिनमें पेशेवर, व्यावसायिक, दूरसंचार, समुद्री, वित्तीय और पर्यावरणीय सेवाएं शामिल हैं। इससे ईयू के व्यवसायों को भारत में निवेश और नवोन्मेषी सेवाएं लाने में आसानी होगी, जबकि भारतीय पेशेवरों के लिए नवाचार, कौशल संबंधी आदान-प्रदान और ज्ञान-आधारित आर्थिक वृद्धि का लाभ मिलेगा।

एफटीए में पेशेवरों के लिए अस्थायी प्रवेश और प्रवास की एक सुनिश्चित व्यवस्था है, जिसमें कारोबार के लिए यात्रा करने वाले, एक-दूसरे की कंपनियों में स्थानांतरण पाने वाले, अनुबंध पर सेवाओं की आपूर्ति करने वाले और स्वतंत्र पेशेवर शामिल हैं। एफटीए से भारतीय पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जिन ईयू सदस्य देशों में विनियम मौजूद नहीं हैं, वहां आयुष चिकित्सक भारत में प्राप्त अपनी पेशेवर योग्यताओं के आधार पर सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।  

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