यूपी में टीईटी, टीजीटी, पीजीटी परीक्षा की तारीखों का एलान, UPESSC ने जारी किया कैलेंडर, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच होंगी परीक्षाएं
लखनऊ/ प्रयागराज, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (यूपीईएसएससी) ने लंबे इंतजार के बाद शिक्षक भर्ती परीक्षाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। मंगलवार को आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद टीईटी, टीजीटी, पीजीटी और सहायक आचार्य भर्ती परीक्षाओं की नई तिथियों की घोषणा की गई। जारी कैलेंडर के अनुसार अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच परीक्षाएं होंगी।
आयोग के अनुसार, लंबे समय से अटकी भर्ती प्रक्रिया को गति देने के लिए परीक्षाएं चरणबद्ध ढंग से कराई जाएंगी। सभी परीक्षाएं कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ आयोजित की जाएंगी। परीक्षा केंद्र, पाली और प्रवेश पत्र से संबंधित जानकारी अभ्यर्थियों को समय से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी परीक्षाएं निर्धारित समय पर कराई जाएंगी और किसी भी तरह की अफवाहों से बचने के लिए अभ्यर्थी केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
परीक्षा कार्यक्रम (संभावित तिथियां)
• सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या–51) : 18–19 अप्रैल 2026
• प्रवक्ता PGT (विज्ञापन संख्या–02/2022) : 9–10 मई 2026
• प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक टीजीटी (विज्ञापन संख्या–01/2022) : 3–4 जून 2026
• यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी 2026) : 2, 3 और 4 जुलाई 2026
तीन साल बाद यूपी में होगी टीईटी परीक्षा
यूपी में आखिरी बार टीईटी परीक्षा 21 जनवरी 2022 को हुई थी। इससे पहले 28 नवंबर 2021 को प्रस्तावित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के कारण निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद प्रशासनिक कारणों से परीक्षा लगातार टलती रही, जिससे लाखों अभ्यर्थी असमंजस में थे। अब परीक्षा कैलेंडर जारी होने से अभ्यर्थियों में तैयारी को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
बिना टीईटी पास शिक्षक योग्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर स्पष्ट किया है कि बिना टीईटी उत्तीर्ण किए कोई भी शिक्षक योग्य नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उन्हें इस्तीफा या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें इस शर्त से राहत दी गई है। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर यह आदेश लागू होगा या नहीं, इस पर निर्णय बड़ी पीठ करेगी। इस फैसले का असर देशभर में करीब 10 लाख और अकेले यूपी में लगभग 2 लाख शिक्षकों पर पड़ने का अनुमान है।
