बसंत पंचमी पर बन रहा दुर्लभ महासंयोग, ज्योतिषाचार्य से जानें शुभ मुहूर्त और पूजन का सही समय
कानपुर, अमृत विचार। बसंत पंचमी का पर्व इस बार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों ने इस बार पर्व पर विशेष संयोग होना बताया है। कहा कि चतुर्ग्रही योग के संयोग में इस बार बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस साल मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र ग्रह विराजमान होने से यह संयोग बना है।
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि बसंत पंचमी 23 जनवरी को रात 2:28 बजे शुरू होगी और 24 जनवरी को रात 1:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर बसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी पर पूजन का शुभ मुहूर्त इस बार सुबह 6 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। पर्व पर इस साल मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र ग्रह विराजमान रहेंगे।
ऐेसे में 23 जनवरी को पंचमी तिथि और चतुर्ग्रही योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। जो बेहद शुभदायक माना जाता है। उन्होंने बताया कि माता शारदा के पूजन के लिये भी बसंत पंचमी का दिन विशेष शुभ रहता है। इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को पीले-मीठे चावलों का भोजन कराए जाने की मान्यता है।
मां शारदा और कन्याओं का पूजन करने के बाद पीले रंग के वस्त्र और आभूषण कन्याओ, निर्धनों व विप्रों को देने से परिवार में ज्ञान, कला व सुख -शान्ति की वृ्द्धि होती है। इसके अलावा इस दिन पीले फूलों से शिवलिंग की पूजा करना भी विशेष शुभ माना जाता है।
वास्तुदोष का उपाय
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, कई बार घर में वास्तु-दोष होने के कारण विद्यार्थी को शिक्षा में उचित परिणाम नहीं मिलते हैं। ऐसे में उन्हें बसंत पंचमी के दिन से ही पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर के दिशा में पढ़ाई करना चाहिए। इस दिशा को ध्यान एवं शांति का केंद्र भी माना जाता है। इस दिशा में पढ़ाई करने से विद्यार्थी का मन एवं मस्तिष्क एकाग्रचित रहता है।
केसर व चंदन का टीका
इस दिन विद्यार्थी माता सरस्वती को केसर या पीले चंदन का टीका लगाएं और पीले रंग के वस्त्र जरूर अर्पित करें। साथ ही पूजा स्थल पर किताब और कलम अवश्य रखें। ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहती है और विद्यार्थी को ज्ञान, बुद्धि एवं विवेक का आशीर्वाद मिलता है।
