IIT Kanpur : सूर्य के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का बनाया मॉडल, आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों ने 30 साल के आंकड़ों का किया इस्तेमाल

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। आईआईटी कानपुर की ओर से सूर्य के भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया है। इस मानचित्र के लिए शोधकर्ताओं ने 30 सालों के सतही प्रेक्षणीय आंकड़ों को त्रिआयामी रूप से विकसित किया है। इस शोध से सूर्य किस प्रकार अंतरिक्ष मौसम को संचालित करता है यह साफ होने में सहायता करेगा। जो उपग्रहों, रेडियो संचार, नेविगेशन प्रणालियों और तकनीकी परिसंपत्तियों को बाधित कर सकता है।

आईआईटी कानपुर के भौतिकी विभाग के पीएचडी छात्र सौम्यदीप चटर्जी और प्रो. गोपाल हज़रा के साथ हाल ही में एक अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित किया है। शोधकर्ताओं ने एक त्रिआयामी डायनेमो मॉडल विकसित किया, जो तीन दशकों तक के सौर सतह चुंबकीय क्षेत्र के दीर्घकालिक प्रेक्षणीय आंकड़ों को आत्मसात करता है।

30 वर्षों के सतही चुंबकीय क्षेत्र के आंकड़ों को एक र्थीडी संगणकीय मॉडल में जोड़कर, अध्ययन यह जांच करता है कि बड़े पैमाने पर औसत चुंबकीय पैटर्न समय के साथ कैसे विकसित होते हैं और सूर्य के भीतर पूरे त्रिआयामी चुंबकीय क्षेत्र का मानचित्रण करता है। इस पद्धति के पीछे यह विचार है कि यदि सूर्य के गहरे भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र सतह की चुंबकीय संरचना को आकार देने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, तो उनके संकेत लंबे समय तक एकत्र किए गए सतही अवलोकनों में जरूर दिखाई देंगे।

प्रेक्षणीय आंकड़ों पर आधारित

इस शोध की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरी तरह सैद्धांतिक सिमुलेशनों के बजाय प्रेक्षणीय आंकड़ों पर दृढ़ता से आधारित है। वास्तविक डेटा से जुड़े होने के कारण, शोधकर्ता सूर्य की सतह के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों की तीव्रता, संरचना और विकास पर सार्थक सीमाएं निर्धारित करने में सक्षम हुए हैं। इस मॉडल का सत्यापन सौर ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र के अवलोकनों के माध्यम से किया गया है। यह ध्रुवों के पास फैला हुआ एक चुंबकीय क्षेत्र है, जिसे अगले सौर चक्र की तीव्रता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

शोधकर्ताओं ने दिया सुझाव

शोधकर्ताओं का यह भी सुझाव है कि उनका यह शोध अगले सौर चक्र के शिखर का पूर्वानुमान लगाने के लिए अत्यंत मजबूत है। सौर चक्र के अन्य किसी भी पूर्वानुमान मॉडल की तुलना में अधिक यथार्थवादी है। यह अध्ययन यह भी दर्शाता है कि बड़े पैमाने के प्रेक्षणीय आंकड़ों के साथ संगणकीय मॉडल का संयोजन इस क्षेत्र का भविष्य है। इसके साथ ही यह अंतरिक्ष मिशनों और प्रौद्योगिकियों को सौर गतिविधि से सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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