कौशल क्रांति को मिलेगा नया आयाम, एक लाख युवाओं को मिलेगा रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और उद्यमिता को नई गति देने के उद्देश्य से नोएडा परिधान निर्यात क्लस्टर और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। एमओयू के तहत आगामी पांच वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 18 जिलों के 128 विकास खंडों और 10,323 गांवों से जुड़े एक लाख युवाओं को 28 विभिन्न क्षेत्रों में अल्पकालिक, रोजगारोन्मुख कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। 

प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद लगभग 70 हजार युवाओं को औद्योगिक इकाइयों में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि कुल प्रशिक्षुओं में 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई मजबूती मिलेगी। देश के अग्रणी परिधान निर्यात क्लस्टरों में शामिल एनएईसी, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप विशेषकर गारमेंट एवं संबद्ध क्षेत्रों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा।

 प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक की पूरी प्रक्रिया एनएईसी के डिजिटल पोर्टल 'कौशल गंगा' के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके साथ ही 'कौशल आजीविका' और 'कौशल बाजार' पोर्टल प्रशिक्षुओं को आजीविका और बाजार से जोड़ने में सहायक होंगे। इस सहयोग में राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद की अहम भूमिका होगी।

भारत सरकार के राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) से मान्यता प्राप्त एससीवीटी प्रशिक्षुओं के मूल्यांकन और प्रमाणन का कार्य करेगी। एमओयू के तहत एनएईसी द्वारा प्रति प्रशिक्षु 1,200 रुपये प्रमाणन शुल्क एससीवीटी को दिया जाएगा। साथ ही एससीवीटी स्वयं स्तर पर पाठ्यक्रम विकसित कर उन्हें राष्ट्रीय परिषद से अनुमोदित भी कराएगी। 

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा कुशल बने और उसे रोजगार के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने कहा कि एनएईसी और एससीवीटी के बीच यह एमओयू उद्योग और शिक्षा के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा। 

एमओयू पर हस्ताक्षर के अवसर पर व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम तथा विशेष सचिव एवं निदेशक, एससीवीटी अभिषेक सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल को प्रदेश की कौशल नीति के क्रियान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। 

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