गणतंत्र दिवस 2026 : राष्ट्र के नाम संबोधन में बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू- 'भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा'

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत सहित सभी राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में देशवासियों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि भारतीय समाज में असीम शक्ति है और उसके सहयोग से देश में क्रांतिकारी बदलाव लाये जा रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने 77 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार शाम देश के नाम संबोधन में कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत आज भी दुनिया की सबसे तेज गति से बढने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है और हम " निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ रहे हैं। " 

उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय अवसंरचना के निर्माण में निवेश कर देश अपनी आर्थिक अवसंरचना का उच्च स्तर पर पुनर्निर्माण कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहा,"आर्थिक नियति के निर्माण की यात्रा में, आत्म-निर्भरता और स्वदेशी हमारे मूलमंत्र हैं।" उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संविधान के महत्व, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं की भूमिका , देश की सभ्यता , संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की शक्ति का उल्लेख किया। 

उन्होंने देश की प्रगति में सशस्त्र सेनाओं और पुलिस बलों के जवानों, किसानों, शिक्षकों, डाक्टरों, नर्सों , युवाओं , सफाईकर्मियों , वैज्ञानिक और इंजीनियर,उद्यमियों और निस्वार्थ रूप से काम करने वाले समाजसेवकों तथा सरकारी और गैर सरकारी संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने सरकार द्वारा महिलाओं, आदिवासियों और गरीबों तथा वंचित वर्ग के लोगों के सशक्तिकरण और कल्याण के कार्यक्रमों और उपलब्धियों का भी जिक्र किया।

राष्ट्रपति ने अलग-अलग संदर्भों में सरदार वल्लभभाई पटेल, महाकवि सुब्रमण्य भारती , नेताजी सुभाष चंद्र बोस , महात्मा गांधी , बिरसा मुंडा, बंकिम चंद्र चटोपाध्याय , श्री नारायण गुरू, रविन्द्रनाथ ठाकुर, बाबा साहेब अंबेडकर और महर्षि अरविंदों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियानों को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है तथा इसमें गांव और शहरों में स्थानीय संस्थाओं को प्रगतिशील बदलाव का माध्यम बनाया गया है।

उन्होंने कहा ," विकसित भारत का निर्माण सभी देशवासियों की साझा जिम्मेदारी है। समाज में असीम शक्ति होती है। सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को समाज का सक्रिय समर्थन मिलने से क्रांतिकारी बदलाव आते हैं। " 
उन्होंने इस संदर्भ में डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लोकप्रियता का उल्लेख किया और कहा कि यह विश्व समुदाय के लिए प्रभावशाली उदाहरण बन गया है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि इसी तरह अन्य राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सभी देशवासी अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। 

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, " भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थ-व्यवस्था है। विश्व-पटल पर अनिश्चितता के बावजूद भारत में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। हम, निकट भविष्य में, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में निवेश करके, हम अपनी आर्थिक संरचना का उच्च-स्तर पर पुनर्निर्माण कर रहे हैं। आर्थिक नियति के निर्माण की यात्रा में, आत्म-निर्भरता और स्वदेशी हमारे मूलमंत्र हैं। " 

उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के देश के आर्थिक एकीकरण का महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि इससे पूरे देश में एकीकृत बाजार बना है और इस प्रणाली को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए हाल में किये गये फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक शक्ति मिलेगी। श्रम सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चार श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रमिकों को फायदा मिलेगा तथा उद्यमों के कारोबार में वृद्धि को गति मिलेगी। 

राष्ट्रपति ने किसानों को भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था का मेरुदंड बताते हुए कहा कि उनकी परिश्रमी पीढ़ियों ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है। उनके बल पर ही देश कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात कर रहा है। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा को उच्च प्राथमिकता दे रही है। 
उन्होंने कहा , " किसान भाई-बहनों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिले, रियायती ब्याज पर ऋण मिले, प्रभावी बीमा सुरक्षा मिले, खेती के लिए अच्छे बीज मिलें, सिंचाई की सुविधाएं मिलें, अधिक उत्पादन के लिए उर्वरक उपलब्ध हों, उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाए तथा जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए, इन सभी विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है। 'पीएम किसान सम्मान निधि' के द्वारा किसान भाई-बहनों के योगदान को आदर दिया जा रहा है तथा उनके प्रयासों को संबल प्रदान किया जा रहा है।" 

राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में निहित न्याय, स्वतन्त्रता, समता और बंधुता के आदर्श हमारे गणतन्त्र को परिभाषित करते हैं। राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष सम्पन्न होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है। 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बाबासाहब आंबेडकर मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनैतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है। 

उन्होंने कहा कि मतदान में महिलाओं की बढ़ती हुई भागीदारी हमारे गणतन्त्र का एक शक्तिशाली आयाम है। उन्होंने खेल के मैदान से लेकर अंतरिक्ष की उडान तक महिलाओं के योगदान का जिक्र किया और कहा ," महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। हमारी बहनें और बेटियां, परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं देश के समग्र विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। दस करोड़ से अधिक स्व सहायता समूह से जुड़ी बहनें विकास की नई परिभाषा लिख रही हैं। " 

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है। महिलाओं के राजनैतिक सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने वाले 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से, महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी। विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों से गरीबी के साथ जूझ रहे करोड़ों देशवासियों को, गरीबी की सीमा-रेखा से ऊपर लाया गया है। 

साथ ही, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि वे पुनः गरीबी में न फंसे। इसी सदर्भ में उन्होंने 'पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना' का जिक्र किया जिसके लगभग 81 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिल रही है। गरीब परिवारों के लिए बिजली-पानी तथा शौचालय की सुविधा से युक्त 4 करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण करके, उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने तथा आगे बढ़ने का आधार प्रदान किया गया है। 

भारत को युवाओं की सबसे बड़ी आबादी का देश बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं में असीम प्रतिभा है और युवा उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और पेशेवर देश में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं तथा विश्व-स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही, पूरी मानवता हमारी सभ्यता, संस्कृति तथा आध्यात्मिक परम्परा से लाभान्वित होती रही है। 

उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि आज का भारत, नए आत्म-विश्वास के साथ, अपनी गौरवशाली परम्पराओं के प्रति सचेत होकर आगे बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में हमारी आध्यात्मिक परंपरा के पवित्र स्थलों को जन-चेतना के साथ जोड़ा गया है। 

भारतीय ज्ञान परंपरा में दर्शन, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, गणित, साहित्य तथा कला की महान विरासत के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व की बात है कि 'ज्ञान भारतम् मिशन' जैसे प्रयासों से भारतीय परंपरा में उपलब्ध रचनात्मकता को संरक्षित और प्रसारित किया जा रहा है। यह मिशन भारत की लाखों अमूल्य पाण्डुलिपियों में संचित विरासत को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ाएगा। 

भारतीय भाषाओं तथा भारतीय ज्ञान परम्परा को प्राथमिकता देकर हम आत्म-निर्भरता के प्रयासों को सांस्कृतिक आधार प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अब आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। संविधान को भारतीय भाषाओं में पढ़ने और समझने से, देशवासियों में संवैधानिक राष्ट्रीयता का प्रसार होगा तथा आत्म-गौरव की भावना मजबूत होगी।

 राष्ट्रपति ने कहा कि कारोबार और जीवन में सुगमता के लिए सरकार और जन-सामान्य के बीच की दूरी को निरंतर कम किया जा रहा है और अनेक अनावश्यक नियमों को निरस्त किया गया है तथा कई अनुपालनों की औपचारिकता को समाप्त किया गया है। आतंकवाद को लेकर देश के दृष्टिकोण में आये बदलाव का संकेत देते हुए उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और उसमें आतंकवाद के ठिकानों पर सटीक प्रहार की बात कही । 

उन्होंने कहा कि इस अभियान में आतंक के अनेक ठिकानों को ध्वस्त किया गया तथा बहुत से आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया गया। सुरक्षा के क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता से ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता को शक्ति मिली। राष्ट्रपति ने तीनों सेनाओं के महत्वपूर्ण बेस की अपनी यात्राओं के अनुभवों को याद करते हुए कहा , " थल-सेना, वायु-सेना और नौसेना की शक्ति के आधार पर, हमारी सुरक्षा-क्षमता पर देशवासियों को पूरा भरोसा है।" 

पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने जिम्मेदारी के साथ संसाधनों के इस्तेमाल की जरूरत पर बल दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति के साथ समन्वित जीवन-शैली भारत की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि यही जीवन-शैली, विश्व समुदाय को दिए गए हमारे संदेश पर्यावरण के लिए जीवन शैली का आधार है। 

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