यूपी : एसी कमरों में बैठकर कानून बनाने से समाज नहीं चल सकता- बृजभूषण
गोंडा, अमृत विचार : यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर मचे बवाल के बीच पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह नियम बनाने वालों पर कड़ा प्रहार किया है। यूजीसी के प्रावधानों पर एतराज जताते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि एसी कमरों में बैठकर कानून बनाने से समाज नहीं चल सकता। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह इस कानून के पूर्णतया विरोध में हैं तथा सरकार से अपील की इस कानून को तत्काल वापस लिया जाए।
पूर्व सांसद ने कहा कि सरकार दलित और ओबीसी बच्चों के संरक्षण के लिए यह कानून लेकर आई है जिसके कारण बड़ी भ्रामक स्थिति हो गई है। देश में बड़े पैमाने पर इसका विरोध हो रहा है। उन्होने कहा कि पंडित दीनदयाल जी ने कहा था की जो नीचे हैं उनको ऊपर लाना है और यही हमारी सनातन परंपरा है। यही हमारी सवर्ण परंपरा है कि जो नीचे हैं उनके साथ भेदभाव न करना, उनको ऊपर लेकर आना, और आज मैं सरकार से कहना चाह रहा हूं कि समाज कैसे चलता है यह ऑफिस में बैठकर के समाज को नहीं चलाया जा सकता है। समाज को चलाना है तो गांव आइए और देखिए कि बिना किसी भेदभाव के, बिना किसी जातीय रंग के, एक साथ बच्चे कैसे खेलते हैं। कोई बच्चा किसी की जाति नहीं पूछता है। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि आप ऐसा माहौल खड़ा कर रहे हैं तो आपसे हाथ जोड़कर के विनती है इस मामले को वापस लीजिए। पूर्व सांसद ने कहा कि उन्होने राष्ट्र कथा कराई। उसमें 52 जाति समाज के धर्म गुरुओं से कथा का उद्घाटन कराया। उनसे एक-एक वृक्ष लिया और मैं सनातन वाटिका बनाने जा रहा हूं। आपने तो कानून बना करके हमारे उस मिशन को स्वाहा कर दिया। उन्होने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि
कोई बच्चा गलती करता है जो क्षमा करने योग्य नहीं है तो उसको आप सजा दीजिए यदा कदा घटनाएं घट जाती हैं सजा दीजिए। उसमें कोई विरोध नहीं है, लेकिन यह जो कानून है यह समाज में टकराव पैदा करेगा। समाज को फाड़ फाड़ कर देगा और इससे आने वाले समय में देश का बहुत नुकसान होगा। राष्ट्र का बहुत नुकसान होगा। समाज बंट जाएगा। उन्होने अफसरों को नसीहत देते हुए कहा कि इस कानून को तत्कील वापस लीजिए और भाईचारा स्थापित करिए। पूर्व सांसद ने एससी एसटी एक्ट, दहेज उत्पीड़न व महिला उत्पीड़न को लेकर बनाए गये कानूनों पर भी सवाल उठाया और कहा कि इन कानूनों का सर्वाधिक दुरुपयोग हो रहा है। इनकी समीक्षा करने की जरूरत है। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह कानून के पूर्णतया विरोध में हैं और अगर जरूरत पड़ेगी तो आंदोलन होगा।
कैसरगंज सांसद करण भूषण ने दी सफाई,कहा- मैं अपने समाज के लोगों के साथ
अमृत विचार: यूजीसी की स्टैडिंग कमेटी के सदस्य रहे कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह ने यूजीसी मामले पर अपनी सफाई दी है। करण भूषण सिंह ने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज फेसबुक पर लिखा कि संसद की जिस स्टैंडिंग कमेटी के वह सदस्य हैं, उस कमेटी का इन नियमों के निर्माण में कोई भी योगदान नहीं था। सांसद ने कहा कि यूजीसी मामले पर उनकी भावनाएं उनके समाज के लोगो के साथ हैं। यूजीसी पर उनके स्टैंड को लेकर सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चलाए जा रहे कैंपैन को उन्होने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। करण भूषण ने कहा कि सोशल मीडिया एवं समाचार चैनल के माध्यम से मीडिया के एक धड़े द्वारा यूजीसी के नए नियम को लेकर मेरे विरुद्ध अनेकों प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रहीं है। बिना मेरा पक्ष जाने ऐसा कैंपेन चलाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होने मांग की कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अपने इस नियम पर पुनः विचार करते हुए जन भावना का सम्मान करे और इसमें आवश्यक सुधार लेकर आए, जिससे समाज में जाति आधारित किसी प्रकार की वैमनस्यता न फैलने पाये। हम अपने शिक्षण संस्थाओं को जातिगत युद्ध का केंद्र बनने नहीं दे सकते हैं। हम सबको साथ लेकर चलना चाहते है।
सदर विधायक प्रतीक पहले ही जता चुके हैं विरोध
गोंडा सदर से भाजपा विधायक व बृजभूषण के बड़े बेटे प्रतीक भूषण सिंह यूजीसी के नए प्रावधानों पर अपना विरोध पहले ही दर्ज कर चुके हैं। दो दिन पहले प्रतीक भूषण ने भी अपने फेसबुक पेज पर इस बात का जिक्र किया था। प्रतीक ने लिखा था कि इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए। जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को 'अतीत की बात' कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर 'ऐतिहासिक अपराधी' के रूप में चिन्हित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।
