UP में ब्लैकआउट : पुलिस लाइन पहुंचे सीएम योगी, आपात स्थित से निपटने को तैयार दिखा उत्तर प्रदेश

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश में आज यानी 23 जनवरी को 6 बजे ब्लैकआउट हुआ। प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ हुये ब्लैकआउट के कारण कुछ देर के लिए पूरे प्रदेश में अंधेरा छा गया। बताया जा रहा है यह ब्लैकआउट एक मॉक ड्रिल का हिस्सा रहा है। इस दौरान 6 बजते ही 2 मिनट के लिए पूरी तरह से ब्लैकआउट किया गया।

दरअसल, प्रदेश में नागरिक सुरक्षा और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार शाम 74 जिलों में व्यापक ब्लैकआउट और मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पुलिस लाइन में मौजूद रहे और पूरे अभ्यास की निगरानी की। सायरन बजते ही तय समय पर लाइटें बंद कर दी गईं और कुछ ही पलों में शहर अंधेरे में डूब गया।

लखनऊ में पुलिस लाइन परिसर में रेस्क्यू ऑपरेशन, घायलों को सुरक्षित निकालने और त्वरित चिकित्सा सहायता का अभ्यास किया गया। बरेली में ब्लैकआउट के दौरान सिविल डिफेंस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने ऊंची इमारतों से फंसे लोगों को निकालने का अभ्यास किया। कानपुर और कानपुर क्षेत्र के अन्य जिलों में धमाके जैसी आवाज के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लेटने और अंधेरे में अनुशासन बनाए रखने का अभ्यास कराया गया। अयोध्या में धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आपात स्थिति से निपटने की मॉक ड्रिल की गई, जहां त्वरित निकासी और सुरक्षा घेरा बनाने पर जोर रहा। वहीं मुरादाबाद में घायल नागरिकों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने और अस्पतालों की इमरजेंसी तैयारियों की जांच की गई।

इस मॉक ड्रिल में पुलिस, सिविल डिफेंस, एनडीआरएफ, होमगार्ड, फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरी तरह सक्रिय रहीं। विभिन्न एजेंसियों के समन्वय, रिस्पॉन्स टाइम और संसाधनों के उपयोग की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने फीडबैक लेकर टीमों की तत्परता की सराहना की। शासन के अनुसार ब्लैकआउट का उद्देश्य हवाई हमले या अन्य आपात स्थितियों में शहरों की लोकेशन छिपाने और नागरिकों को अनुशासित रहने का अभ्यास कराना है। माघ मेले के कारण प्रयागराज में ब्लैकआउट नहीं कराया गया। यह अभ्यास नागरिक सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

लखनऊ में हुई मॉक ड्रिल

आज ब्लैकआउट के दौरान उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित पुलिस लाइन में भी मॉक ड्रिल की गई।  यह पूरी तरह से ऑपरेशन सिंदूर के समय हुई मॉक ड्रिल की याद दिला रही थी। जिसको देखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे। मॉक ड्रिल में हवाई हमले किये जा रहे थे, घरों में आग लग रह थी, हर तरफ अफरा तफरी का माहौल रहा, लोग घायल होकर गिर रहे थे, हर तरफ चीख पुकार का नजारा था, हवाई हमले के लिए दुश्मन देश ड्रोन की मदद ले रहे थे। वहीं हमले की सूचना पर सायरन बजाती फायर बिग्रेड की गाड़ियां और एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची रही थीं, जो मौके पर घायलों को इलाज दे रहे थे, इतना ही नहीं अस्पताल भी पहुंचा रहे थे। वहीं घरों में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम भी हो रहा था।

नेताजी की जयंती पर मॉक ड्रिल, हवाई हमले जैसे हालात का किया गया अभ्यास

बाराबंकी में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर शहर में घोषित ब्लैकआउट के बाद शुक्रवार शाम पुलिस लाइन स्थित परेड ग्राउंड में आपातकालीन हालात से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। शाम ठीक छह बजे अचानक पूरे क्षेत्र की बिजली बंद कर दी गई, जिसके साथ ही हवाई हमले की चेतावनी देते हुए सायरन गूंज उठा। सायरन बजते ही परेड ग्राउंड में बनी झोपड़ी और एक मकान में आग लगने का दृश्य रचा गया। धुएं का गुबार उठने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया। हालांकि यह स्थिति पूरी तरह नियंत्रित अभ्यास का हिस्सा थी।

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सूचना मिलते ही पुलिस, सुरक्षा बल, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और बम निरोधक दस्ता तत्काल मौके पर पहुंचा। फायर ब्रिगेड की टीम ने तेजी से आग पर काबू पाया, वहीं घायल बने लोगों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास किया गया। बम निरोधक दस्ते ने इलाके की घेराबंदी कर संदिग्ध बम को निष्क्रिय करने की कार्रवाई की। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनज़र मौजूद लोगों को जमीन पर लेटने के निर्देश दिए गए। मौके पर तैनात डॉक्टरों की टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार प्रदान किया। पूरे अभ्यास का दृश्य इतना वास्तविक था कि कुछ समय के लिए यह किसी वास्तविक आपात स्थिति जैसा प्रतीत हुआ। इस मॉक ड्रिल की निगरानी जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय स्वयं मौके पर मौजूद रहकर करते रहे। अधिकारियों ने बताया कि अभ्यास का उद्देश्य आपातकाल या हवाई हमले जैसी परिस्थितियों में प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता व आपसी समन्वय का परीक्षण करना है। प्रशासन के अनुसार, इस तरह के अभ्यास से आमजन की सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता को और मजबूत किया जाएगा।

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