Moradabad: रामराज्य को समझने के लिए पहले लोकतंत्र के वास्तविक अर्थ को समझें

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। उदीषा चौपाला साहित्योत्सव में सोमवार को सुबह से शाम तक जॉन एलिया जोन, रामगंगा लांस और दुष्यंत मंच पर विचारों की आवाजाही, संवेदनाओं की गर्माहट और रचनात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह रहा। कहीं संवाद थे जो वर्तमान को टटोल रहे थे, कहीं कथाएं थीं जो स्मृति को जीवित कर रही थीं, कहीं सुर थे जो मिट्टी की पहचान बता रहे थे।

आखिरी दिन के आयोजन का प्रमुख आकर्षण प्रसिद्ध कवि व वर्तमान में कथावाचन कर रहे कवि कुमार विश्वास की प्रस्तुति अपने–अपने राम रहा। दुष्यंत लांस में उनके कार्यक्रम को सुनने व देखने के लिए लोग सुबह से ही उत्साहित रहे। रामकथा के माध्यम से लोग अपने समय, अपने समाज और अपने भीतर झांकते चले गए। कुमार विश्वास ने कहा कि हम लोकतंत्र या गणतंत्र जैसे शब्दों का प्रयोग तो करते हैं, लेकिन पिछले 75 वर्षों में जो व्यवस्था हमने देखी है, उसमें ‘तंत्र’ पहले आ गया और ‘लोक’ पीछे छूटता चला गया। कहा कि यदि रामराज्य की परिकल्पना को समझना है, तो सबसे पहले लोकतंत्र के वास्तविक अर्थ को समझना होगा। 

हमारे यहां प्रचलित शब्द ‘राजनीति’ पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उसका शाब्दिक अर्थ तो राज्य का नेता होता है, जबकि सही अर्थों में शब्द ‘लोकनेता’ और ‘लोकनीति’ होना चाहिए। जब लोक पहले आएगा और नेता तथा नीति उसके पीछे होंगे, तभी रामराज्य की अनुभूति संभव होगी। कुमार विश्वास ने कहा कि श्रीराम के जीवन में लोक सर्वोपरि है-लोक की संवेदना, लोक की पीड़ा और लोक की मर्यादा। उसमें पिता का वचन भी शामिल है, माता द्वारा मांगा गया वचन भी और स्वयं की मर्यादा भी। उन्होंने कहा कि राम लोक के नेता हैं और राम का राज्य लोक का राज्य है। कहा कि आज भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि राजनीति राष्ट्रनीति से ऊपर चली गई है।

वहीं आखिरी दिन सोमवार के सत्र की शुरुआत जॉन एलिया जोन में आयोजित मल्टीमीडिया वर्कशाप से हुई। वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया विशेषज्ञ प्रमोद सिंह और विजेन्द्र एस. विज ने पत्रकारिता और रचनात्मक अभिव्यक्ति में मल्टीमीडिया के बढ़ते प्रभाव, डिजिटल माध्यमों की बदलती भूमिका, तकनीकी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पत्रकार और रचनाकार के लिए तकनीक केवल साधन नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की नई भाषा बन चुकी है। सत्र का संचालन रचित ने किया।

इसके बाद रामगंगा लांस में आयोजित दास्तानगोई के सत्र में हिमांशु वाजपेयी और प्रजा शर्मा ने कथावाचन की इस पारंपरिक और प्रभावशाली विधा के माध्यम से शब्द, स्मृति और कल्पना की सजीव प्रस्तुति दी। उनकी दास्तानों ने श्रोताओं को भारतीय कथात्मक परंपरा के भावलोक से जोड़ा और वातावरण को आत्मीय संवेदना से भर दिया। जॉन एलिया जोन में भारतीय ज्ञान परंपरा विषयक सत्र में आचार्या डॉ. सुमेधा ने भारतीय दर्शन, शास्त्रों, लोकबोध और ज्ञान परंपरा की निरंतरता पर गहन प्रकाश डाला। सत्र का कुशल संचालन प्रमोद पांडे ने किया।

रामगंगा लॉन्स में स्त्री: स्वर, संघर्ष और संवेदना विषय पर आयोजित सत्र में वंदना राग, प्रत्यक्षा और योगिता यादव ने स्त्री जीवन के सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक अनुभवों को अत्यंत संवेदनशील और सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने स्त्री की आवाज़, उसके संघर्ष और उसकी संवेदना को साहित्य, संगीत और समाज के व्यापक संदर्भ में रखा। इस संवाद को दिशा देने का कार्य मॉडरेटर विजय तनवीर ने किया।

जॉन एलिया जोन में ओजस विषयक सत्र में ओजेश प्रताप सिंह ने मुरादाबाद की समृद्ध संगीत परंपरा, विभिन्न घरानों और सांगीतिक विरासत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह नगर केवल पीतल नगरी ही नहीं, बल्कि संगीत की सुदीर्घ परंपरा का भी साक्षी रहा है। सत्र का संचालन विनीत गोस्वामी ने किया।

बैडमैन को देखने व सुनने की ललक
दुष्यंत लांस में कहानी, किरदार और सिनेमा सत्र में फिल्मी दुनिया में बैडमैन के नाम से मशहूर खलनायक गुलशन ग्रोवर और फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर ने सिनेमा में चरित्र निर्माण, सामाजिक यथार्थ और कहानी कहने की प्रक्रिया पर अपने अनुभव साझा किए। सत्र का संचालन इरफान ने किया। आखिर में गुलशन ग्रोवर ने अपनी फिल्मों के डायलॉग लोगों की डिमांड पर बोल कर सभी को अपनी अदाकारी का कायल बना लिया। वहीं,रामगंगा लांस में पारसी थियेटर की प्रस्तुति “सीता वनवास” को अतुल तिवारी और उनके समूह ने भावपूर्ण ढंग से मंचित किया।जॉन एलिया जोन में आयोजित रंगकर्म का भविष्य: ओटीटी और माइक्रो फिल्म के दौर में विषयक सत्र में अमिताभ श्रीवास्तव, प्रमोद सिंह और अशोक पाठक ने रंगमंच के समक्ष खड़ी नई चुनौतियों और तकनीक के प्रभाव पर गंभीर विमर्श किया। सत्र की मॉडरेटर प्रियंका शर्मा रहीं।

अभी बंद नहीं हुआ है ऑपरेशन सिंदूर
दुष्यंत मंच पर ऑपरेशन सिंदूर: मीडिया, मिथक और जनभावनाएं विषयक सत्र में मेजर जनरल बिपिन बक्शी, कर्नल अजय सिंह और आनंद के सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य अभियानों और मीडिया की भूमिका पर तथ्यपरक और स्पष्ट विचार रखे। सत्र का संचालन विवेक ठाकुर ने किया। कर्नल अजय सिंह ने बताया कि आजादी के बाद से पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ, युद्ध और आतंकी गतिविधियों के निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं। उरी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक का उद्देश्य दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देना था कि भारत पर किसी भी हमले का सटीक और 

निर्णायक जवाब दिया जाएगा।
इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शेफाली सिंह, महापौर विनोद अग्रवाल, नगर विधायक रितेश गुप्ता, एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, मंडलायुक्त, आंजनेय कुमार सिंह, पूर्वांचलवासी संस्था के अध्यक्ष विवेक ठाकुर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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