UP: रजिस्ट्री से पहले होगा आधार वेरिफिकेशन, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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पीलीभीत, अमृत विचार। जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर अब पूरी तरह लगाम लगने जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने और भू-माफियाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए निबंधन विभाग एक फरवरी से आधार सत्यापन की अनिवार्य व्यवस्था लागू करने जा रहा है। 

अब रजिस्ट्री के दौरान खरीदार, विक्रेता के साथ-साथ गवाहों के आधार नंबर का भी मौके पर ही सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए जिले के सभी उप-निबंधक कार्यालयों को बायोमेट्रिक मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं। रजिस्ट्री तभी पूरी होगी, जब आधार से पहचान की पुष्टि हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था से फर्जी आधार, फर्जी गवाह और बेनामी संपत्तियों की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगेगी।

एआईजी स्टांप सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि निबंधन विभाग के पोर्टल को यूआईडीएआई के सर्वर से जोड़ दिया गया है। जैसे ही पक्षकार बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाएंगे, दिल्ली स्थित केंद्रीय सर्वर से उनकी पहचान तुरंत सत्यापित हो जाएगी। पहचान सही होने पर ही साफ्टवेयर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। 

उन्होंने बताया कि अभी तक केवल आधार की फोटोकॉपी से काम चल जाता था, जिससे धोखाधड़ी की आशंका बनी रहती थी। जिले की तीनों तहसीलों सदर, बीसलपुर और पूरनपुर में हर माह सैकड़ों बैनामे होते हैं। नई तकनीक लागू होने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद हो जाएगी। 

विभागीय कर्मचारियों को नई प्रणाली के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। नई व्यवस्था में केवल फिंगरप्रिंट पर निर्भरता नहीं रहेगी। जिन लोगों की उंगलियों के निशान घिस जाने के कारण बायोमेट्रिक मिलान नहीं हो पाता, उनके लिए फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर भी सत्यापन किया जा सकेगा। 

इतना ही नहीं नई व्यवस्था में गवाहों का आधार सत्यापन अनिवार्य होने से उनकी पहचान स्थायी रूप से रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी। इससे भविष्य में कानूनी विवादों में गवाह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं पाएंगे और बेनामी संपत्तियों के पंजीकरण पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

 

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