UP Budget 2026-27: पौने नौ लाख करोड़ का हो सकता है प्रदेश का बजट, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे बड़ा दांव... शिक्षा–कृषि–स्वास्थ्य पर भी रहेगा फोकस

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: योगी सरकार की ओर से 11 फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट का आकार इस बार पौने 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसबार भी सरकार पिछले साल अपना प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट होने का रिकार्ड तोड़ेगी। इसबार इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे बड़ा हिस्सा मिलेगा, इसके बाद, शिक्षा, कृषि व स्वास्थ्य पर फोकस रहेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना इस साल पंचायत चुनाव और अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लोकलुभावन बजट प्रावधानों की तैयारी में लगातार समीक्षा कर चुके हैं। सरकार ने जिलों से लेकर शासन के सभी विभागों से विकास कार्यों के साथ-साथ आम जनता की सुविधाओं को मजबूत करने वाले प्रस्ताव मंगाए थे। सूत्रों के अनुसार, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलने की संभावना है। सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, शहरी विकास, औद्योगिक ढांचे और कनेक्टिविटी से जुड़े कार्यों पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा सकता है। इसके बाद शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर भी उल्लेखनीय आवंटन की तैयारी है।

पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश का बजट लगभग 8.08 लाख करोड़ रुपये का था, जो अपने आप में रिकॉर्ड था। उससे पहले की तुलना में इसमें करीब 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। अब प्रस्तावित बजट इससे भी बड़ा होने की उम्मीद है, जिसमें जनकल्याणकारी योजनाओं को और विस्तार दिया जाएगा। बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने, गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए संचालित योजनाओं को मजबूती देने पर विशेष ध्यान रहेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की तैयारी है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किए जा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य तेज विकास के साथ-साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखना भी है।

यहां सबसे ज्यादा आवंटन की उम्मीद

• 25% इंफ्रास्ट्रक्चर

• 15% शिक्षा

• 12% कृषि

• 8% स्वास्थ्य

• 5% सामाजिक सुरक्षा योजनाओं

बीते तीन वर्षों में यूपी बजट का आकार

• 2023-24 : लगभग 6.90 लाख करोड़ रुपये

• 2024-25 : लगभग 7.66 लाख करोड़ रुपये

• 2025-26 : लगभग 8.08 लाख करोड़ रुपये

 

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