Bareilly : टैक्स के 59.18 करोड़ दबाए बैठे आईवीआरआई को अल्टीमेटम
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस वित्तीय वर्ष तक का टैक्स जमा कराने के आदेश
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम ने शहर के सबसे बड़े बकायेदारों में शामिल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। निगम ने संस्थान पर बकाया टैक्स के 59.18 करोड़ रुपये मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही जमा करने के लिए सख्त नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद हुई है। इसके बाद संस्थान में खलबली मची हुई है।
दरअसल, नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार लंबे समय से करोड़ों रुपये दबाए बैठे आईवीआरआई को पहले कई नोटिस भेजे गए, लेकिन संस्थान ने इसका कोई ध्यान नहीं दिया और टैक्स माफी के लिए कोर्ट के चक्कर लगाता रहा। आईवीआरआई ने 2007 में हाईकोर्ट में केस हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क लगाया कि संस्थान केंद्र सरकार के अधीन है और निगम का अधिकार नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बहाने को ठुकरा दिया और स्पष्ट किया कि टैक्स अदा करना ही पड़ेगा। नगर आयुक्त संजीव कुमार ने कहा कि 21 जनवरी को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के बकाया टैक्स की गणना कर 59.18 करोड़ रुपये तय किए हैं।
आईवीआरआई के निदेशक को पत्र भेजकर कहा गया है कि चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरी राशि सरकारी कोष में जमा कराई जाए। जारी नोटिस में यह भी साफ किया गया कि अगर संस्थान को किसी बिल या बकाया राशि पर आपत्ति है, तो वह सबूतों के साथ प्रत्यावेदन दे सकता है। कोर्ट की तरफ से आईवीआरआई को चार सप्ताह की मोहलत दी गई है। इसके बाद भी समय पर जवाब न मिलने या भुगतान न होने पर निगम वैधानिक कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगा। इधर, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आईवीआरआई को बकाया राशि अब जमा करना ही होगा। उन्होंने यह भी बताया कि चूंकि आईवीआरआई निगम के बड़े बकायेदारों की सूची में शामिल है। ऐसे में यह राशि जमा होने के बाद निगम के राजस्व में वृद्धि होगी।
