Bareilly : बरेली शहर स्वच्छता में नया मुकाम बनाने को तैयार, टॉप-10 रैंकिंग की जगी आस
बरेली, अमृत विचार। स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 में बेहतर रैंकिंग हासिल करने के लिए नगर निगम पूरी तरह मैदान में उतर गया है। शहर की गलियों, नालों और सार्वजनिक स्थानों पर सुबह से ही सफाई का काम जोर-शोर से चल रहा है। नगर निगम की टीम खाली पड़े प्लॉटों से कचरा हटाने, टूटी-खराब स्ट्रीट लाइटें बदलने और डिवाइडरों पर रंग-रोगन कराने में जुटी हुई है।
वहीं, नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य भी स्वयं वार्डों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं। पिछले साल जुलाई में तीन से दस लाख वाले शहरों में देश में बरेली शहर को 20वीं रैंक मिली थी, इस बार शहर को देश में टॉप टेन में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
शहर में 80 वार्ड है, इन सभी वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को नियमित और प्रभावी बनाया जा रहा है। नालियों की विशेष सफाई कराई जा रही है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की केंद्रीय टीम किसी भी दिन सर्वेक्षण के लिए शहर में आ सकती है। टीम का आगमन अचानक होता है, इसलिए नगर निगम लगातार तैयारियों में लगा हुआ है। इसी वजह से शहर की सफाई और निगरानी का काम दिन-रात चल रहा है। सभी वार्डों में गली-गलियारा, सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई की जा रही है, ताकि नागरिकों को साफ-सुथरा और स्वस्थ वातावरण मिले। कचरा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने कई विशेष कदम उठाए हैं। ''बरेली 311'' एप के माध्यम से नागरिक अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करवा सकते हैं, जिससे समस्याओं का तुरंत समाधान किया जा सके। इसके अलावा शहर में स्ट्रीट लाइटों की जांच और मरम्मत, सड़क किनारों की सफाई और नियमित निगरानी के साथ ही पौधरोपण और हरियाली बढ़ाने के अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इन प्रयासों से शहर न सिर्फ स्वच्छ दिख रहा है, बल्कि हरियाली और सुंदरता भी बढ़ रही है।
निगरानी व्यवस्था सख्त, हर वार्ड पर नजर
नगर निगम ने स्वच्छता सर्वेक्षण के मद्देनजर अपनी निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। हर वार्ड में सफाई की जिम्मेदारियां तय की गई हैं, लापरवाही मिलने पर तत्काल कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करने के साथ ही संवेदनशील इलाकों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार नजर रखने के अफसरों को निर्देश दिए हैं। साथ ही, शिकायत निवारण प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय किया गया है, ताकि नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके और शहर की सफाई में कोई कमी न रहे। यह कदम बरेली की स्वच्छता रैंकिंग को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खोदी और ऊबड़ खाबड़ सड़कें डाल सकती हैं प्रभाव
स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में रैंकिंग बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण सीवर लाइन डालने के लिए खोदी गईं सड़कों की समय से मरम्मत न होना पाना रहा था। इसी तरह वर्तमान में भी शहर में कई जगह सीएम ग्रिड के तहत सड़क खोदकर डाल दी गई है। इस वजह से जाम की समस्या भी बनी रहती है। सीएम ग्रिड योजना के तहत राजेंद्रनगर और डीडी पुरम में निर्माण शुरू हुए एक साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन केवल 60 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। वहीं, दूसरी तरफ शहर के प्रमुख गल्ला बाजार श्यामगंज में साहू गोपीनाथ से श्यामगंज चौराहे तक पेयजल लाइन बिछाए हुए दस दिन से अधिक बीत चुके हैं। उबड़-खाबड़ सड़क के कारण लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए पूरी तरह तैयार है। हर वार्ड में विशेष निगरानी टीमों की तैनाती की गई है, जो नियमित रूप से गलियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का निरीक्षण करती हैं। इन सतत प्रयासों का उद्देश्य बरेली को देश के शीर्ष स्वच्छ शहरों में शामिल करना है। इस सकारात्मक पहल से शहर के नागरिक भी प्रेरित हो रहे हैं और स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी दिखा रहे हैं।
