आजमगढ़ : नीलकंठ आलू से किसानों को नई उम्मीद, 'शुगर-फ्री' होने का दावा

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आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में खेती के क्षेत्र से एक उत्साहजनक पहल सामने आई है। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जिला उद्यान विभाग ने आलू की विशेष प्रजाति 'नीलकंठ' का बीज उपलब्ध कराया है। दावा किया जा रहा है कि नीले छिलके वाला यह आलू शुगर के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकता है और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बनेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं जिले के प्रगतिशील किसान चंद्रदेव राम यादव 'करेली' ने इस प्रजाति का परीक्षण किया है। उन्होंने लगभग 5000 वर्ग फीट क्षेत्र में इसकी बुवाई की। पहली खुदाई के दौरान एक पौधे में 12 आलू प्राप्त हुए। खुदाई के बाद आलू का रंग मटमैला था, लेकिन धुलाई के बाद इसका रंग बैंगनी दिखाई दिया, जो इसके नाम 'नीलकंठ' के अनुरूप है।

यादव ने बताया कि जिला उद्यान विभाग द्वारा उन्हें यह बीज 'शुगर-फ्री' आलू के रूप में उपलब्ध कराया गया था। पैदावार से वे संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रजाति वास्तव में मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी सिद्ध होती है तो किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन सकती है। अगले वर्ष वे इसे अधिक क्षेत्रफल में लगाने की योजना बना रहे हैं।

जिला उद्यान अधिकारी हरिशंकर ने यूएनआई को बताया कि 'नीलकंठ' आलू की यह प्रजाति जिले में पहली बार 15 कुंतल की मात्रा में मंगाई गई, जिसकी कीमत 2915 रुपये प्रति कुंतल थी। इसकी संभावित पैदावार 350 से 400 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक बताई जा रही है और यह 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस प्रजाति में पोटेशियम, विटामिन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं तथा यह एंटीऑक्सीडेंट गुणों से युक्त है।

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