Moradabad: मुफ्त पैड का दावा बेदम, बाहर से खरीदना बना मजबूरी, सरकारी अस्पतालों से बुनियादी सुविधाएं नदारद

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Edited By Amrit Vichar
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शुभम शर्मा, मुरादाबाद। सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं को मुफ्त इलाज व जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इन दावों से मेल नहीं खा रही। जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को डिलीवरी के बाद सेनेटरी पैड तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। हालात यह हैं कि तीमारदारों को मजबूरी में बाहर मेडिकल स्टोर से महंगे पैड खरीदकर लाने पड़ रहे हैं।

सरकारी व्यवस्था के अनुसार अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं को मुफ्त पैड और हाइजीन किट दी जानी चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो और महिलाओं को स्वच्छता संबंधी दिक्कत न झेलनी पड़े। लेकिन वार्डों में तैनात स्टाफ द्वारा स्टॉक खत्म है कहकर मरीजों को लौटा दिया जा रहा है। बुधवार को अमृत विचार की टीम ने जिला महिला अस्पताल में पड़ताल की तो कई प्रसूताओं और उनके परिजनों ने पैड न मिलने की बात कही। प्रसूता अनम, खुशी, प्रवेश और गुंजन ने बताया कि उन्हें डिलीवरी के बाद एक बार भी पैड उपलब्ध नहीं कराया गया।

बंगला गांव निवासी पूनम के पति प्रेम शंकर ने बताया कि स्टाफ से कई बार कहने के बावजूद पैड नहीं दिए गए। चौरासी घंटा निवासी आशा ने कहा कि उनकी बहू की डिलीवरी के बाद केवल एक बार पैड दिया गया, उसके बाद दोबारा मांगने पर स्टॉक खत्म होने की बात कह दी गई। गोविंदनगर निवासी प्रीति के पति रवि ने भी यही आरोप लगाया कि एक बार पैड देने के बाद दोबारा मांगने पर मना कर दिया गया। वहीं, तीमारदार अनीता देवी ने बताया कि उन्हें भी बाहर से पैड खरीदकर लाने पड़े।

 प्रसूताओं और उनके परिजन का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बावजूद छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बाहर पैसा खर्च करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. रणवीर सिंह ने कहा कि अस्पताल में महिलाओं को पैड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यदि किसी को पैड नहीं मिले हैं तो मामले की जांच कराई जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कपड़े का इस्तेमाल करने को मजबूर प्रसूताएं
अस्पताल में प्रसव के लिए आ रहीं आर्थिक रूप से कमजोर प्रसूताएं कपड़े का इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि प्रसूताओं का शरीर बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे में घटिया स्तर की रूई या कपड़े से सर्जिकल इंफेक्शन और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इससे भविष्य में बांझपन जैसी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

 

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