UP : प्रदेश की पहली आबकारी नीति लागू, मदिरा व एथेनॉल निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

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Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : राज्य सरकार ने उद्योग, कृषि और निर्यात को नई गति देने के उद्देश्य से पहली बार पृथक आबकारी निर्यात नीति लागू की है। यह नीति तीन वित्तीय वर्षों के लिए तैयार की गई है और इसके माध्यम से एथनॉल व पेय मदिरा के निर्यात को प्रोत्साहन देने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह जानकारी आबकारी मंत्री नीतिन अग्रवाल ने गुरुवार को दी। उन्होंने बताया कि नीति के प्रमुख उद्देश्यों में स्थानीय कृषि से जुड़े अनाज एवं फल आधारित एथनॉल और अन्य उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि करना शामिल है। इसके साथ ही पेय मदिरा निर्यात के लिए औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, डिस्टिलरी, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं जैसे सहायक क्षेत्रों का विस्तार कर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का लक्ष्य तय किया गया है।

आबकारी मंत्री ने बताया कि उप्र. देश का पहला राज्य बन गया है जिसने तीन वित्तीय वर्षों के लिए अलग से आबकारी निर्यात नीति लागू की है। निर्यात प्रोत्साहन के तहत निर्धारित पेय क्षमता के 25 प्रतिशत तक के समतुल्य निर्यात पर बोतल भराई शुल्क, निर्यात पास फीस, फ्रैंचाइजी फीस और स्पेशल फीस की दरों को न्यूनतम स्तर तक कम कर दिया गया है। इसके अलावा निर्यात किए जाने वाले मदिरा ब्रांडों के ब्रांड पंजीकरण और लेबल अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल करते हुए फीस दरों में भी कटौती की गई है। उन्होंने बताया कि नीति के अंतर्गत अन्य राज्यों को शीरा आधारित ईएनए (एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल) के निर्यात पर शुल्क घटाकर 50 पैसे प्रति बल्क लीटर कर दिया गया है। साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आसवनियों को हेरिटेज मदिरा निर्माण, टेस्टिंग टैवर्न और फुटकर बिक्री की अनुमति के प्रावधान भी किए गए हैं।

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