UP : राजधानी का एक ऐसा अस्पताल जो सिर्फ नाम का ही ‘किंग’
200 साल पुराने किंग्स इंग्लिश चिकित्सालय के पास न अपनी इमारत, न पूरे संसाधन
पंकज द्विवेदी, लखनऊ, अमृत विचार : राजधानी के टूड़ियागंज क्षेत्र स्थित किंग्स इंग्लिश चिकित्सालय आज अपने गौरवशाली इतिहास के विपरीत बदहाली का शिकार नजर आ रहा है। प्रदेश के सबसे पुराने जिला अस्पतालों में शुमार यह चिकित्सालय अब केवल नाम का ‘किंग’ बनकर रह गया है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल के पास न तो अपनी इमारत है और न ही एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के बराबर संसाधन।
करीब 200 वर्ष पूर्व एक राजा द्वारा स्थापित इस अस्पताल में कभी अंग्रेजों और उनकी फौज का इलाज हुआ करता था। 20 बेड से शुरू हुआ यह अस्पताल आज भी उसी क्षमता पर सिमटा हुआ है, जबकि समय के साथ सुविधाएं लगातार खत्म होती चली गईं। आजादी के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया, लेकिन वर्षों की उदासीनता ने इसकी पहचान को धूमिल कर दिया।
2013 में छोड़ी अपनी इमारत, तब से उधारी में संचालन
अस्पताल वर्ष 2013 तक अपनी मूल इमारत में संचालित होता रहा। भवन जर्जर घोषित होने के बाद इसे पास स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की पुरानी इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उसी जर्जर भवन में अस्पताल का संचालन किया जा रहा है, जो खुद भी असुरक्षित स्थिति में है।
फर्नीचर से लेकर मशीन तक जर्जर
अस्पताल में संसाधनों का भारी अभाव है। फर्नीचर के नाम पर टूटी कुर्सियां, मेज और बेड मौजूद हैं। एक्सरे मशीन वर्षों से खराब पड़ी है। ऑपरेशन थिएटर (ओटी) बंद है। आवश्यक स्टाफ की भी भारी कमी है। जहां अस्पताल में तीन डॉक्टर, एक एक्सरे टेक्नीशियन और तीन स्टाफ नर्स की तैनाती निर्धारित है, वहीं वर्तमान में केवल एक डॉक्टर (अधीक्षक), दो फार्मासिस्ट, दो वार्ड बॉय और तीन सफाई कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
बदहाली के बावजूद लोगों का भरोसा कायम
इन तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद स्थानीय लोगों का इस अस्पताल पर भरोसा आज भी बना हुआ है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इलाज कराने आए करीब 80 वर्षीय एक बुजुर्ग ने बताया कि वे बचपन से ही इसी अस्पताल से इलाज कराते आ रहे हैं, इसलिए आज भी यहीं आते हैं।
वर्जन
अस्पताल में सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। ओपीडी में मरीजों को देखा जा रहा है। 20 बेड पर भर्ती कर उपचार की सुविधा भी दी जा रही है। उपलब्ध स्टाफ और संसाधनों के अनुसार मरीजों की सेवा की जा रही है।
-डॉ. आरसी गुप्ता,अधीक्षक, किंग्स इंग्लिश चिकित्सालय
