वैज्ञानिक फैक्ट: लेजर, पानी और भौतिकी का जादू

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Published By Anjali Singh
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यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन लेजर किरण वास्तव में पानी की धारा के भीतर ‘फंस’ सकती है। यह कोई जादू नहीं, बल्कि भौतिकी की एक प्रसिद्ध और रोचक घटना है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) कहा जाता है। यही सिद्धांत आज फाइबर ऑप्टिक्स और हाई-स्पीड इंटरनेट की नींव भी है।

इस घटना को समझाने के लिए हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक सरल, लेकिन प्रभावशाली प्रयोग किया। उन्होंने साफ पानी से भरे एक टैंक के एक सिरे पर लेजर लगाया। टैंक के दूसरे सिरे पर एक छोटा सा छेद बनाया गया, जिससे पानी बाहर निकलकर बाल्टी में गिर रहा था। जब लेजर किरण को बहती हुई पानी की धारा पर डाला गया, तो आश्चर्यजनक रूप से रोशनी पानी के बाहर नहीं फैली, बल्कि धारा के साथ-साथ मुड़ती चली गई।

असल में, पानी और हवा के बीच अपवर्तनांक (Refractive Index) का अंतर इस प्रभाव के लिए जिम्मेदार होता है। पानी में मौजूद भारी कण लेजर की गति को धीमा कर देते हैं। जब लेजर किरण एक विशेष कोण पर पानी और हवा की सीमा से टकराती है, तो वह बाहर निकलने के बजाय बार-बार अंदर ही परावर्तित होती रहती है। इसी कारण लेजर किरण पानी की धारा के भीतर “कैद” हो जाती है। 

इस प्रयोग के दौरान बहता हुआ पानी लाल रंग के चमकदार झरने जैसा दिखाई देता है, क्योंकि लेजर की लाल रोशनी पूरी धारा में फैल जाती है। खास बात यह है कि जब पानी का प्रवाह धीरे-धीरे कम किया गया, तब भी लेजर किरण धारा के भीतर बनी रही। जैसे ही पानी पूरी तरह बंद हुआ, लेजर किरण भी अचानक गायब हो गई। यह प्रयोग न केवल देखने में बेहद आकर्षक है, बल्कि हमें यह भी समझाता है कि आधुनिक संचार तकनीक, जैसे ऑप्टिकल फाइबर असल में प्रकाश को ‘फंसाकर’ ही सूचना को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाती है।