Bangladesh Elections 2026: BNP की ऐतिहासिक जीत, ये तीन हिंदू उम्मीदवार पहुंचे संसद... अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की नई उम्मीद!
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए भारी बहुमत हासिल किया है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी ने 299 सीटों वाली संसद में 211 से 212 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत प्राप्त किया है। वहीं, मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को महज 68 सीटें मिलीं, जबकि कुछ अन्य सीटें स्वतंत्र और छोटे दलों के खाते में गईं।
यह चुनाव शेख हसीना के शासन के पतन के बाद पहला बड़ा लोकतांत्रिक टेस्ट था, जहां जनता ने लोकतंत्र की बहाली और सुधारों की मांग की। Awami League को चुनाव लड़ने से रोका गया था, जिससे मुकाबला मुख्य रूप से BNP और Jamaat के बीच रहा।
अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सकारात्मक संकेत!
चुनाव में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच अच्छी खबर यह है कि तीन हिंदू उम्मीदवारों ने BNP के टिकट पर जीत दर्ज की। ये सभी BNP के मजबूत चेहरे हैं और उनकी जीत अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
1. गयेश्वर चंद्र रॉय – ढाका-3 सीट से जीते
वरिष्ठ BNP नेता और स्टैंडिंग कमेटी सदस्य गयेश्वर चंद्र रॉय ने 99,163 वोट हासिल कर Jamaat-e-Islami के उम्मीदवार मोहम्मद शाहीनुर इस्लाम को हराया। वे पहले राज्य मंत्री रह चुके हैं और यह उनकी मजबूत वापसी है। ढाका जैसे प्रमुख क्षेत्र से उनकी जीत खास मायने रखती है।
2. निताई रॉय चौधरी – मगुरा-2 सीट से विजयी
पूर्व राज्य मंत्री (युवा एवं खेल) निताई रॉय चौधरी ने 1,47,896 वोट लेकर Jamaat के मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,000+ वोटों से मात दी (जमात उम्मीदवार को 1,17,018 वोट मिले)। गयेश्वर चंद्र रॉय के साथ उनका रिश्तेदारी संबंध है, जो परिवार की राजनीतिक ताकत को दर्शाता है।
3. एडवोकेट दीपेन दीवान – रंगमती सीट पर कब्जा
एडवोकेट दीपेन दीवान ने 31,222 वोट हासिल कर स्वतंत्र उम्मीदवार पहल चकमा (21,544 वोट) को हराया। पहाड़ी इलाके रंगमती से उनकी जीत आदिवासी-हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।
ये तीनों जीतें BNP के समावेशी चेहरे को उजागर करती हैं, खासकर तब जब Jamaat के एकमात्र हिंदू उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर, अल्पसंख्यक उम्मीदवारों की संख्या 79 रही, लेकिन सफलता मुख्य रूप से BNP के इन तीन चेहरों को मिली।
आगे क्या?
तारिक रहमान जल्द ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं। सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बधाइयां आ रही हैं। यह जीत बांग्लादेश में लोकतंत्र की नई शुरुआत का प्रतीक है, जहां अल्पसंख्यक भी मुख्यधारा की राजनीति में मजबूती से शामिल हो रहे हैं।
