उत्तर प्रदेश में 3.26 करोड़ मतदाताओं को एसआईआर नोटिस : मुख्य निर्वाचन अधिकारी

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
On

लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआई) के तहत 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया कि सिर्फ नोटिस न मिलने की वजह से किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। रिणवा ने एसआईआर की हालिया प्रगति का ब्योरा देते हुए नोटिस, विसंगतियों की पहचान करना और नाम जोड़ने-हटाने में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-छह और फॉर्म-सात से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट किया। 

यहां एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में "नो मैपिंग" या तार्किक विसंगतियां पाई गईं उन्हें नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम मसौचा सूची में थे, उन्हें नोटिस भेजे गए। इनमें से 1.04 करोड़ मतदाताओं ने पिछली एसआईआर के दौरान संबंधित कॉलम खाली छोड़ दिया था और मतदाता सूची की ''मैपिंग'' पूरी नहीं की थी, जबकि 2.22 करोड़ के रिकॉर्ड में तार्किक गड़बड़ियां थीं। उन्होंने बताया कि 1.85 करोड़ नोटिस वितरित किए जा चुके हैं और 1.15 करोड़ मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है। रिणवा ने कहा, "पांच फरवरी तक केवल 30 लाख सुनवाई हुई थीं। 18 फरवरी की सुबह तक यह संख्या 1.15 करोड़ पहुंच गई और पिछले तीन दिनों में ही करीब 37 लाख सुनवाई पूरी हुईं।" 

उन्होंने भरोसा जताया कि सभी सुनवाई 27 मार्च की तय समयसीमा के भीतर पूरी हो जाएंगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी मतदाता का नाम सिर्फ इसलिए सूची से नहीं हटाया जाएगा क्योंकि उसे नोटिस नहीं मिला। उन्होंने कहा, "यदि किसी तक नोटिस नहीं पहुंचा है तो वह पहुंच जाएगा, पर्याप्त समय है।'' रिणवा ने बताया कि शुरुआत में 403 विधानसभा क्षेत्रों में 4,003 चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) तैनात थे, जबकि अब ईआरओ और एईआरओ सहित कुल 13,161 अधिकारी सुनवाई कर रहे हैं। फॉर्म-6 (नाम जोड़ने) के बारे में उन्होंने कहा कि छह जनवरी से 17 फरवरी के बीच 54.4 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 27,20,320 महिलाएं थीं, जो पुरुषों से अधिक हैं। फॉर्म-7 (नाम हटाने) को लेकर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि छह जनवरी से 17 फरवरी के बीच 1,40,425 आवेदन मिले, जिनमें 55,752 महिलाएं थीं।

उन्होंने बताया कि 16 फरवरी तक मिले 1,35,412 फॉर्म-सात आवेदनों में से 70,865 स्वयं नाम हटाने के अनुरोध थे, जबकि 18,863 अपने-आप हटाने (ऑटो-डिलीशन) के मामले थे और 47,684 दूसरे लोगों द्वारा दिए गए थे। उन्होंने कहा कि कुल 23,935 नाम हटाए गए, जिनमें 14,388 'ऑटो-डिलीशन' से, 5,211 स्वयं के अनुरोध से और 4,336 अन्य लोगों के अनुरोध पर हटाए गए। उन्होंने कहा कि 'ऑटो-डिलीशन' फॉर्म तब बनते हैं जब कोई मतदाता कहीं और चला जाता है और नए स्थान पर पंजीकृत हो जाता है, या मृत्यु जैसे मामलों में। समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा कि बातचीत से संकेत मिला कि तार्किक विसंगतियों और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े नोटिसों पर और स्पष्टता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "अनुपालन आसान बनाने के लिए प्रक्रिया सरल की गई है।" अधिकारी ने किसी दल का नाम लिए बिना कहा कि नाम हटाने के आरोप सही नहीं हैं और इसे समझाने के लिए उन्होंने कई शिकायतों के उदाहरण भी दिए। 

ये भी पढ़ें : वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर: 24 घंटे में बदलेगा दिल्ली-यूपी का मौसम, IMD की चेतावनी, तापमान में आएगी गिरावट

संबंधित समाचार