लखनऊ और अयोध्या में दिख गया चांद : कल से माह-ए- रमज़ान, बिखरी रौनक

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Published By Virendra Pandey
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अयोध्या, अमृत विचार : चांद दिखने के बाद कल यानी गुरुवार से माह-ए-रमज़ान की शुरुआत होगी। 19 फरवरी से पहला रोज़ा रखा जाएगा। रमज़ान मुस्लिमों के लिए रहमत, मगफिरत और नजात का महीना है। इस दौरान रोज़ेदार सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक अल्लाह की इबादत, कुरान तिलावत और नेकी के कामों में मशगूल रहते हैं।

लखनऊ में बुधवार को रमजान का चांद नजर आया है, मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने चांद दिखाई देने का ऐलान किया है। कमेटी के मुताबिक गुरुवार यानी जुमेरात (19 फरवरी ) को पहला रोजा होगा।

वहीं चांद दिखाई देने के बाद अयोध्या में मस्जिदें रौशन हो गई हैं। तरावीह की नमाज़ से मस्जिदें गूंजने लगी हैं। मुस्लिम बहुल मोहल्लों में रहमत की रौनक छा गई है। लोग एक-दूसरे को रमज़ान मुबारक कहकर मुबारकबाद दे रहे हैं। कई मस्जिदों और संगठनों ने गरीबों और जरूरतमंदों के लिए इफ्तार और सहरी का प्रबंध किया है।

रहमत, इबादत और खुद-सुधार का महीना: मुफ़्ती ए शहर

पवित्र रमज़ान माह को लेकर मुफ़्ती मोइनुद्दीन अशरफी मिस्बाही मुफ्ती ए शहर व सरपरस्त मरकजी अंजुमन तबलीग अहले सुन्नत जामा मस्जिद टाट शाह ने अपने संदेश में कहा कि रमज़ान का मुबारक महीना अत्यंत बरकतों और रहमतों वाला महीना है। इसी पाक महीने में कुरआन मजीद का नुज़ूल हुआ, जो समस्त मानवता के लिए अल्लाह तआला की महान नेमत है। कहा कि रमज़ान की विशेषताओं में यह भी शामिल है कि इसमें फ़र्ज़ इबादत का सवाब 70 गुना तक बढ़ा दिया जाता है, जबकि नफ़्ल इबादत का सवाब फ़र्ज़ के बराबर कर दिया जाता है। हदीस शरीफ़ के हवाले से उन्होंने बताया कि यदि लोग रमज़ान और रोज़े की वास्तविक अहमियत को जान लें तो हर व्यक्ति यह चाहेगा कि पूरा साल ही रमज़ान बना रहे।

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