यात्रा टाइपराइटर के आविष्कार की
मानव सभ्यता के विकास में लेखन का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। हाथ से लिखे दस्तावेज लंबे समय तक संचार और प्रशासन का आधार रहे, किंतु औद्योगिक क्रांति के दौर में जब व्यापार, न्यायालय और सरकारी कार्यों का विस्तार हुआ, तब तेज और स्पष्ट लेखन की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। इसी आवश्यकता ने टाइपराइटर के आविष्कार की दिशा में अनेक प्रयासों को जन्म दिया।
18 वीं शताब्दी में इंग्लैंड के हेनरी मिल ने एक “राइटिंग मशीन” का पेटेंट अवश्य कराया, पर उसका कोई ठोस मॉडल सामने नहीं आ पाया। 19 वीं शताब्दी में विभिन्न आविष्कारकों ने प्रयोग किए, परंतु मशीनें जटिल और अव्यावहारिक सिद्ध हुईं। अंततः इस दिशा में निर्णायक सफलता अमेरिकी आविष्कारक क्रिस्टोफर लाथम शोल्स को मिली। उन्होंने 1860 के दशक में अपने साथियों के साथ मिलकर एक ऐसी मशीन विकसित की, जो अक्षरों को यांत्रिक ढंग से कागज पर उकेर सकती थी।
शोल्स के इस आविष्कार को 1874 में व्यावसायिक रूप से उत्पादन का अवसर मिला, जब प्रसिद्ध कंपनी Remington & Sons ने इसे बाजार में उतारा। “Sholes and Glidden Typewriter” के नाम से प्रसिद्ध इस मशीन ने कार्यालयों की कार्यशैली बदल दी। इसी के साथ QWERTY की-बोर्ड लेआउट भी अस्तित्व में आया, जिसे टाइपबार के आपस में फंसने की समस्या से बचने के लिए तैयार किया गया था। यही लेआउट आज भी कंप्यूटर कीबोर्ड पर प्रचलित है।
वैज्ञानिक के बारे में
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क्रिस्टोफर लाथम शोल्स का जन्म 14 फरवरी 1819 को अमेरिका में हुआ। वे पेशे से पत्रकार, संपादक और राजनीतिज्ञ भी थे। युवावस्था में उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस और समाचार-पत्रों से जुड़कर काम किया, जिससे उन्हें लेखन और मुद्रण तकनीक में गहरी रुचि हुई। वे सामाजिक सुधारों के समर्थक थे और दास-प्रथा के विरोध में भी सक्रिय रहे। बाद में उन्होंने यांत्रिक प्रयोगों की ओर ध्यान दिया और टाइपराइटर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शोल्स का निधन 17 फरवरी 1890 को हुआ, किंतु उनका आविष्कार आज भी आधुनिक कीबोर्ड के रूप में जीवित है।
टाइपराइटर ने न केवल प्रशासनिक कार्यों को गति दी, बल्कि समाज में नई भूमिकाएं भी निर्मित कीं। विशेष रूप से महिलाओं के लिए टाइपिस्ट के रूप में रोजगार के अवसर खुले। पत्रकारिता, न्यायालय और व्यावसायिक पत्राचार में यह मशीन क्रांतिकारी सिद्ध हुई। 20 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में कंप्यूटर और प्रिंटर के आगमन से टाइपराइटर का उपयोग धीरे-धीरे कम हो गया, किंतु लेखन तकनीक के इतिहास में उसका योगदान अमिट है। यह आविष्कार मानव की उस जिज्ञासा और नवोन्मेष की भावना का प्रतीक है, जिसने साधारण लेखनी को यांत्रिक दक्षता में परिवर्तित कर दिया।
