UP : बिजली के निजीकरण के प्रयासों का पूरब से पश्चिम तक हो रहा विरोध

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश में विद्युत विभाग के चल रहे निजीकरण का विरोध पूरब से पश्चिम तक हो रहा है। प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है कि अब औसत लागत अब 8.18 रुपये प्रति यूनिट है। निजीकरण के बाद निजी कंपनियों को न्यूनतम 16 प्रतिशत मुनाफे की गारंटी दी जाएगी, जिससे बिजली दरें बढ़कर कम से कम 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाएंगी।

प्रांतीय विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और भारतीय किसान यूनियन (भानु) का गुट का अलीगढ़ में मंगलवार को एक सम्मेलन हुआ। इस दौरान संघर्ष समिति के संयोजक एवं पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया को निरस्त किया जाना ही चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा लाया गया इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-25 भी वापस लिया जाए। यदि किसान 10 हॉर्स पावर का पंप प्रतिदिन 10 घंटे चलाता है, तो उसे प्रति माह लगभग 2250 यूनिट बिजली खपत पर करीब 22,500 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। साफ है कि निजीकरण का सबसे बड़ा आर्थिक आघात किसानों पर ही पड़ेगा।

भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में प्रदेश के किसान पूरी मजबूती के साथ बिजली कर्मियों के साथ खड़े हैं। इस दौरान स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में भी प्रस्ताव पारित किया गया। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के पूर्व अध्यक्ष वीपी सिंह को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के विद्युत प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

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