ये Holi कुछ खास है... अयोध्या और काशी में खेली जाएगी मक्का के गुलाल से होली

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के समूह ने आटा और मंदिरों के चढ़े फूलों ने बनाया हर्बल गुलाल। खराब नहीं होगी त्वचा, आंख व मुंह में जाने पर नहीं होगा नुकसान

प्रशांत सक्सेना, लखनऊ, अमृत विचार : अयोध्या और वाराणसी में मक्का का आटा और मंदिरों में चढ़े फूलों के अर्क से बने शुद्ध हर्बल गुलाल से होली खेली जाएगी। इससे त्वचा खराब नहीं होगी और आंख व मुंह में जाने पर स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचेगा। बच्चे हो या बुजुर्ग सभी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। गुलाल राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखनऊ के चिनहट की ग्राम उत्तरधौना में संचालित ''सांझी रेखा'' स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण पाकर इसे तैयार किया है।

इनके हर्बल गुलाल हरा, पीला और गुलाबी तीन रंग में उपलब्ध हैं। तीनों ही मक्का के आटे में फूल व सब्जियों से निर्मित किए गए हैं। इनमें हरा रंग देने के लिए आटा में धनिया और पालक के पत्ते मिलाए गए हैं। जबकि पीला रंग का गुलाल आटा में गेंदा के फूल की पंखुड़ी से तैयार किया है और गुलाबी गुलाल चुकंदर व गुलाब के फूल की कलियों से बनाया है। शुद्धता के साथ सुगंध भी लोगों को प्राकृतिक है।MUSKAN DIXIT (98)

सात क्विंटल तक भेजी गुलाल की खेप

20 क्विंटल उत्पादन लक्ष्य के सापेक्ष 15 क्विंटल तक गुलाल तैयार किया है। इसमें अयोध्या, वाराणसी के खासकर काशी और मिर्जापुर में सात क्विंटल गुलाल बिक चुका है और भी मांग आई है। इसके अलावा अंबेडकर नगर, बस्ती, सोनभद्र, लखीमपुर, हरदोई व कानपुर से मांग आने पर खेप भेजी जा रही है। लखनऊ में भी महिलाएं स्वयं थोक व फुटकर स्टॉल लगाकर बिक्री कर रही हैं। 28 फरवरी से विकास भवन, कलेक्ट्रेट, विश्वविद्यालय समेत अन्य सरकारी परिसरों में स्टॉल लगाए जाएंगे।

मंदिरों से एकत्र किए फूल, महिलाएं लाईं सब्जियां

समूह की अध्यक्ष वंदना सिंह ने बताया कि इस कार्य में 18 समूह की महिलाएं जुड़ी हैं। मक्का किसानों से खरीदकर आटा बनाया है, जबकि फूल मंदिरों के चढ़े हुए एकत्र किए हैं। महिलाएं खेती-बाड़ी से जुड़ी हैं, इनके द्वारा धनिया, पालक, चुकंदर एकत्र किया गया है। कोषाध्यक्ष रेखा सोनी बताती हैं कि 40 फीसद तक बचत होती है। एक स्टॉल में चार से पांच हजार की बिक्री हो रही है।MUSKAN DIXIT (99)

गुलाल की कीमत (रुपया प्रति किलो)

गुलाल-थोक - 350-400

गुलाल-फुटकर - 500

गुलाल-200 ग्राम - 100

एक तरफ महिलाओं ने स्वास्थ्य को देखते हुए हर्बल गुलाल बनाया है तो दूसरी तरफ इस कार्य से उन्हें रोजगार मिला है। लोग इस हैंडमेड सामग्री को खरीद कर उत्पादन को बढ़ावा दें।

अजीत कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी, लखनऊ

 

संबंधित समाचार