Holashtak 2026: 24 फरवरी से लग रहा होलाष्टक, बंद होंगे शुभ काम.... 8 दिन क्या करें और क्या नहीं

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Published By Anjali Singh
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अयोध्या, अमृत विचार। होली पर्व के एक सप्ताह पहले 24 फरवरी से होलाष्टक लग रहा है। जिसमे सभी शुभ कार्य करना निषेध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक होलाष्टक दोष शुरू हो जाते हैं। इस अवधि में आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाने की पंरपरा नहीं है। रंग भरी एकादशी 27 फरवरी को और होली का पर्व चार मार्च को मनाया जाएगा।

रामनगरी में इस वर्ष होली का उत्सव भव्य आयोजनों के बीच बड़े उत्साह के साथ मनाए जाने की तैयारी है। दो मार्च की रात्रि में होलिका दहन किया जाएगा, लेकिन तीन मार्च चंद्र ग्रहण के कारण चार मार्च को रंगों का पर्व होली मनाई जाएगी। इसके पहले होलाष्टक की शुरूआत हो रही है। आचार्य प्रवीण शर्मा बताते हैं कि होलाष्टक के दिनों में विवाह, नए निर्माण व नए कार्यों का आरंभ नहीं करना चाहिए। ज्योतिष के दृष्टि से होलाष्टक दोष माना जाता है।

वहीं दूसरी तरफ होली के पांच दिन पहले 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी पर्व पर रंगोत्सव का पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान मंदिरों में साधु-संत जमकर होली खेलते हैं। प्रसिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के नागा-साधु गाजे-बजे और हनुमानगढ़ी के निशान का निशान साथ में अबीर- गुलाल उड़ाते हुए पंचकोसी मार्ग की परिक्रमा करेंगे। रास्ते में पड़ने वाले सभी मंदिरों को होली का निमंत्रण भी देंगे। इसी के साथ अयोध्या के हजारों मंदिरों में एक साथ रंगोत्सव शुरू हो जाएगा। जो होली के महापर्व के दिन तक चलेगा।

हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास ने बताया कि 27 फरवरी से अवध में होली का उत्सव शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यह प्राचीन परंपरा से अखिल भारतीय श्री पंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़े के नागा संत आराध्य के साथ अबीर-गुलाल खेलने की परंपरा का आगे बढ़ाने का कार्य करते चले आ रहें हैं। इसकी शुरुआत रंगभरी एकादशी की सुबह पहली आरती में हनुमंत लला को अबीर का प्रसाद चढ़ाने के साथ होती है। 

इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद में अबीर दिया जाता है। नागा साधु टोली बनाकर मार्ग पर रुक -रुक कर फगुआ गीत गाते हैं और करतब दिखाते हैं। कहा कि इससे पहले हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत प्रेमदास सभी नागा साधुओं के साथ मिलकर उत्सव की शुरुआत करते हैं और जुलूस को आगे ले जाने का आदेश देते हैं। जुलूस का स्वागत श्रद्धालु फूल बरसा कर करते हैं। इसी के साथ नगर के हजारों मंदिरों में आराध्य के साथ होली उत्सव बनाए जाने का कार्यक्रम शुरू हो जाता है।

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