गोमती केवल नदी नहीं, सांस्कृतिक धरोहर ... 'क्लीन गोमती' कार्यशाला में स्वच्छता एवं संरक्षण पर दिया जोर

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार : गोमती केवल नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और लाखों लोगों की आजीविका का आधार है। इसे स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ये बात शुक्रवार को होटल ताज में हुई कार्यशाला में महापौर सुषमा खर्कवाल ने कही।''क्लीन गोमती'' विषय पर आयोजित कार्यशाला में नगर निगम ने गोमती नदी की स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए अपनी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत की।

महापौर ने कहा कि नगर निगम द्वारा नदी में गिरने वाले अपशिष्ट को रोकने, सीवेज प्रबंधन को सुदृढ़ करने, तटों के सौंदर्यीकरण तथा जनजागरूकता अभियानों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। नागरिकों से अपील की कि स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

कार्यशाला में सांसद राज्यसभा संत बलबीर सिंह सीचेवाल, लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, जल पुरुष राजेंद्र सिंह, एडवाइजर नगरीय विकास केशव वर्मा व सीईओ राज्य परिवर्तन आयोग मनोज कुमार सिंह ने विचार रखे। गोमती की स्वच्छता के लिए जनसहभागिता, प्रभावी नीति-निर्माण और ठोस कार्ययोजना की आवश्यकता पर बल दिया।

गोमती नदी के पुनर्जीवन का महत्वपूर्ण कदम : लेफ्टिनेंट जनरल

उप्र राज्य परिवर्तन आयोग की ओर से गोमती नदी के पुनर्जीवन पर रणनीतिक सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, मध्य कमान के जीओसी-इन-सी ने कहा कि लखनऊ की जीवनरेखा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस उच्च स्तरीय मंच में नीति निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और विकास भागीदारों को एक साथ लाया गया ताकि नदी के सतत प्रबंधन के लिए एक समन्वित मार्ग तैयार किया जा सके। इस उच्च स्तरीय मंच में नीति निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और विकास भागीदारों को एक साथ लाया गया ताकि नदी के सतत प्रबंधन के लिए एक समन्वित मार्ग तैयार किया जा सके।

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