प्रदेश व्यापी आंदोलन की तैयारी में बिजली इंजीनियर, निजीकरण-उत्पीडन करने वाले अफसरों पर FIR, समिति बैठक में फैसला

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: बिजली को निजी हाथों में देने और बिजली कर्मियों के आवासों में जबरन मीटर लगा कर उत्पीड़न करने को मुद्दे को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति काफी गुस्से में हैं। समिति ने तय किया है कि यदि उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं थमी तो विभाग के इंजीनियर और कर्मचारी मार्च और अप्रैल में चरणबद्ध तरीके से प्रदेश व्यापी आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि आंदोलन के दौरान क्षेत्रीय एवं परियोजना मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। अप्रैल माह में राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर विशाल प्रदर्शन होगा। जिन अधिकारियों ने मीटर न लगवाने वाले कर्मचारियों की बिजली काटने के निर्देश दिए हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

समिति ने याद दिलाया कि मार्च 2023 के आंदोलन के उपरांत ऊर्जा मंत्री द्वारा पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन को आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेने के निर्देश दिए गए थे। फिर भी उत्पीड़न की प्रक्रिया जारी है।

संघर्ष समिति के मुताबिक निजीकरण के विरोध में पिछले 15 महीनों से जारी आंदोलन के दौरान अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों को सेवा से हटाया गया है। बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। साथ ही फेसियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन रोके जाने जैसी कार्रवाइयों से कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

बिजली दरों मे कमी होने से उपभोक्ताओं को होगा 141.20 करोड़ का लाभ

पावर कॉरपोरेशन द्वारा फरवरी में विद्युत उपभोक्ताओं से की गई दस फीसदी की अतिरिक्त वसूली के मामले में बड़ी राहत की खबर है। प्रदेश भर से वसूला गया करीब 141 करोड़ रुपए अब उपभोक्ताओं को वापस दिया जाएगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि फरवरी-26 माह में विभाग ने उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूल किया था। 

इसके खिलाफ उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में जोरदार विरोध दर्ज किया था। परिणाम यह रहा कि विभाग बैकफुट पर आ गया। इसके चलते मार्च- 26 में 2.42 प्रतिशत बिजली दर में कमी कर दी गई। इसके चलते फरवरी में वसूला गया दस फीसदी अधिक धन उपभोक्ताओं को वापस मिल जाएगा।

विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में दर्ज कराया था विरोध

परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि ईंधन अधिभार शुल्क के मामले में एक नया मामला और सामने आया है। वर्ष 2025-26 के लिए विद्युत नियामक आयोग द्वारा औसत बिलिंग दर रुपया 6.36 प्रति यूनिट तय की गई थी। लेकिन नियामक आयोग ने टेरिफ का आदेश लेट से निकाला। उधर पावर कॉरपोरेशन पुराना औसत बिलिंग दर के हिसाब से ही ईंधन अधिकार शुल्क निकलता रहा। इसमें भी करोड़ों रुपया उपभोक्ताओं को समायोजित करने के लिए आयोग के सामने पूरा मामला रखा जाएगा।

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