चित्रकूट : बच्चों के यौन शोषण में जेई और पत्नी को फांसी की सजा

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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चित्रकूट, अमृत विचार : नाबालिग बच्चों से यौन शोषण कर अश्लील वीडियो को पोर्न साइट में अपलोड करने के मामले में बांदा की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने चित्रकूट के सिंचाई विभाग के निलंबित जेई व उसकी पत्नी को फांसी की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई की टीम भी कोर्ट में मौजूद रही।

मामला साल 2020 का है। सीबीआई को जानकारी मिली थी कि सिंचाई विभाग चित्रकूट में तैनात जेई रामभवन, चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसे संगीन अपराध में लिप्त है। सीबीआई ने रामभवन को एसडीएम कालोनी स्थित किराये के मकान से गिरफ्तार किया था। वहीं साक्ष्य संकलन के दौरान सीबीआई को रामभवन की पत्नी दुर्गावती की भी संलिप्तता मिली थी। इसके बाद दुर्गावती को भी गिरफ्तार किया गया और दोनों को बांदा जेल में निरुद्ध किया गया था। सीबीआई की पूछताछ में रामभवन ने बताया था कि वह पांच से 16 साल के बच्चों को अपना शिकार बनाता था। उन्हें जाल में फंसाने के लिए वह इलेक्ट्रानिक गैजेट्स का लालच देता था। बच्चों के अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर ऑनलाइन बेचा करता था, जिसके लिए उसे अच्छी खासी मोटी रकम मिलती थी। देश-विदेश के कई पोर्न गिरोहों के संपर्क में होने की बात भी उसने स्वीकारी थी। उसने यह भी बताया कि पीड़ित परिवारों को उनके बच्चों के अश्लील फोटो और वीडियो दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था और इसके एवज में उनसे पैसे मांगता था। इससे भी उसने अच्छी खासी रकम मिलती थी। 

पिछले पांच साल से अधिक की अवधि में मामले की कई बार सुनवाई हुई और साक्ष्य संकलित किए गए। शुक्रवार को दोषसिद्ध पाए जाने पर बांदा की विशेष पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोषी दंपती को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अधिवक्ता सौरभ सिंह ने बताया कि इस घिनौने मामले में लगभग 33 नाबालिग बच्चों के शोषण की बात सामने आई।  

कोर्ट ने फैसले में सभी पीड़ित बच्चों को  10- 10 लाख रुपये देने का भी आदेश पारित किया। सजा में किए गए जुर्माने को भी बच्चों को देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि  ऐसे अपराध न केवल पीड़ित बच्चों के जीवन को बर्बाद करते हैं, बल्कि समाज की नैतिक नींव को भी हिला देते हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में सख्ती नहीं बरती गई, तो यह समाज के लिए खतरनाक संदेश होगा। अदालत ने पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, मनोवैज्ञानिक उपचार और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने पीड़ितों को उचित मुआवजा, काउंसिलिंग और शिक्षा-संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के भी आदेश दिए।

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