कानपुर पुलिस कमिश्नर ने ITBP के डीजी को लिखा पत्र, कमांडेंट के बर्ताव पर जताई आपत्ति, कार्रवाई की मांग

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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कानपुर। आईटीबीपी जवान की मां के हाथ काटने वाले मामले में कथित चिकित्सकीय लापरवाही अब तूल पकड़ती जा रही है। सीएमओ की जांच रिपोर्ट में लापरवाही पाए जाने के बाद पुलिस मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है।

जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि महिला की नसों में खून के थक्के बन रहे थे, जिससे सूजन और संक्रमण बढ़ता गया। यदि समय पर वैस्कुलर सर्जन से परामर्श लिया जाता और उचित उपचार किया जाता तो हाथ काटने की नौबत नहीं आती। एसीएमओ सहित चार डॉक्टरों के पैनल ने इसकी पुष्टि की है।

क्या बोले पुलिस कमिश्नर कानपुर

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने स्पष्ट किया कि मुकदमा दर्ज करने में कोई देरी नहीं हुई। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार मेडिकल नेग्लिजेंस के मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाती है। इसलिए हमने प्रशासनिक और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया।”पहली रिपोर्ट अनिर्णायक थी, लेकिन अब दोबारा जांच रिपोर्ट में पारस अस्पताल और कृष्णा अस्पताल की लापरवाही साफ तौर पर सामने आई है। दोनों अस्पतालों पर उपचार में देरी का आरोप है। रिपोर्ट के आधार पर अब मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

आईटीबीपी जवानों के पहुंचने पर कमिश्नर की नाराजगी

कमिश्नर रघुवीर लाल ने आईटीबीपी कमांडेंट के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आईटीबीपी जवानों का पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर फॉर्मेशन बनाकर खड़े होना अनुशासनहीनता है और इससे गलत संदेश जाता है।

नहीं हुआ था कोई घेराव 

कमिश्नर ने साफ किया कि कोई घेराव नहीं हुआ था। उन्होंने खुद आईटीबीपी कमांडेंट और सीएमओ को बुलाया था। इसी दौरान कुछ अतिरिक्त जवान भी आ गए, जिन्हें कार्यालय के बाहर गलत तरीके से तैनात कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “हमारे जवान की मां का मामला है, इसलिए सभी की संवेदना है। लेकिन सब कुछ कानूनी तरीके से होना चाहिए।”

पुलिस कमिश्नर ने डीजी को लिखा पत्र 

पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने आईटीबीपी महानिदेशक (डीजी) को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जैसे ही उन्हें पता चला कि जवान फॉर्मेशन बनाकर खड़े हैं, उन्होंने तुरंत आपत्ति जताई। इसके बाद जवानों को वहां से हटाया गया। कमिश्नर ने इस घटना पर खेद भी व्यक्त किया। मामला अब आईटीबीपी और पुलिस प्रशासन के बीच संवेदनशील मुद्दा बन गया है, जबकि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश जारी है।

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