रामनगरी में होलिकोत्सव का आगाज: रंगभरी एकादशी पर नागा साधुओं ने खेली होली, गाजे बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा
अयोध्या, अमृत विचार। रामनगरी में शुक्रवार को रंगभरी एकादशी के साथ होलिकोत्सव का प्रारंभ हो गया। सुबह हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ संत-महंतों की अगुवाई में नागा साधुओं ने पहले बजरंगी बली को अबीर-गुलाल समर्पित किया। इसके बाद हनुमानगढ़ी के पवित्र निशान, पताका व गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। जिसे अयोध्या के पंचकोसीय क्षेत्र की परिक्रमा की व अन्य मठ मंदिरों में होली खेलने का निमंत्रण भी दिया।जमकर होली खेली।
अयोध्या के हनुमानगढ़ी परिसर में शुक्रवार को रंगभरी एकादशी पर रंगों के बीच आस्था का ज्वार दिखा। सुबह हनुमानजी को अबीर-गुलाल समर्पित करने के बाद नागा साधुओं ने होली खेली। इस दौरान मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने भी एक-दूसरे को रंग लगाया। इसके बाद परंपरागत रूप से कड़ी सुरक्षा के बीच हनुमानगढ़ी के निशान व पताका को लेकर साधु-संतों का जुलूस अयोध्या की सड़कों पर निकला व होली खेलते हुए आगे बढ़ा।
इससे और सड़कें अबीर और गुलाल से रंगी नजर आईं। संतों ने ढोल नगाड़ों कि धुन पर जमकर नृत्य भी किया। जुलूस में नागा साधुओं की टोलियों ने विभिन्न करतब भी दिखाए। होली की मस्ती में सराबोर संतों ने हर आने-जाने वाले लोगों को अबीर गुलाल से रंगा। यह जुलूस अयोध्या के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जुलूस के मार्ग में पड़ने वाले सभी मंदिरों में भी गया। जहां पर भगवान के विग्रह के साथ होली भी खेली। इसके बाद संतों ने अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा कर सरयू स्नान भी किया। इस दौरान हनुमानगढ़ी के संत संजय दास, हेमंत दास, सरोज दास, उपेंद्र दास, राम प्रसाद दास समेत सैकड़ों नागा साधु मौजूद रहे।
भगवान के विग्रह के साथ खेली होली
पुजारी रमेश दास ने बताया कि होली उत्सव के चार दिन पूर्व रंगभरी एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। सभी नागा साधु हनुमान जी महाराज के निशान के साथ मंदिरों में होली का निमंत्रण देते हुए पंचकोसी परिक्रमा की है। मुख्य रूप से राजगोपाल मदिर, नरहरि मंदिर, तुलसी जी की छावनी, मणिरामदास छावनी, राम वल्लभा कुंज, बड़ा भक्त महल में पहुंच कर संतों के साथ रंग खेला गया।
पांच हजार से अधिक मंदिरों में भगवान को लगाया गया अबीर गुलाल
अयोध्या के पांच हजार से अधिक मंदिरों के गर्भगृह में विराजमान भगवान के विग्रह को ब्रह्ममुहूर्त में साज-सज्जा के साथ आरती कर गुलाल लगाया गया। मंदिरों में आने वाले भक्तों को भी प्रसाद के रूप में गुलाल लगाया गया। संजय दास ने बताया कि वसंत पंचमी पर्व से रामनगरी में औपचारिक रूप से मंदिरों में होली का शुभारंभ हो जाता है और प्रतिदिन भगवान को अबीर-गुलाल भी चढ़ाया जाता है। लेकिन फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगभरी एकादशी पर्व से यह रंग और चटक हो जाता है।
राम मंदिर में पुजारियों ने रामलला के संग खेली होली
राम मदिर में भी एकादशी पर्व पर रंगों का उल्लास रहा। सुबह श्रृंगार आरती के बाद मंदिर में पुजारियों ने जमकर रंग बरसाए, भगवान श्रीरामलला और प्रथम तल पर सिया संग विराजमान राजा राम को भी फूलों और अबीर गुलाल लगाया गया। इस दौरान पुजारी ढोल मजीरे के साथ भगवान के भजन करते हुए जमकर अबीर-गुलाल उड़ाए। दर्शन करने आए श्रद्धालु भी इस उत्सव को देख अभिभूत हुए। इस अवसर पर श्रीरामलला को फल, मेवा, मिष्ठान के साथ फलाहार व्यंजनों का भोग भी लगाया गया।
