Health Impacts : रिफाइनरी के धुएं का शरीर पर असर और लंबे समय तक रहने वाले जोखिम, विशेषज्ञों ने दी मास्क और सुरक्षा की सलाह
सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य के जिलॉन्ग शहर में स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी में लगी आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन आग से उठे घने धुएं का असर अब तक हवा में बने रहने से स्थानीय निवासियों में चिंता बनी हुई है। ऐसे हादसों में हवा में कई तरह के प्रदूषक फैलते हैं, जिनकी प्रकृति इस बात पर निर्भर करती है कि क्या जल रहा है, आग कितनी तेज है और कितनी देर तक जलती रहती है।
आग के धुएं से आमतौर पर पीएम2.5 और पीएम10 जैसे सूक्ष्म कण निकलते हैं, जो फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और बेंजीन जैसे विषैले गैस तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिक भी उत्सर्जित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आग से दूर रहने वाले लोगों के लिए ये सूक्ष्म कण अधिक चिंता का विषय होते हैं, क्योंकि ये लंबी दूरी तय कर सकते हैं और हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं।
स्वस्थ वयस्कों में इन प्रदूषकों के अल्पकालिक संपर्क से सामान्यत: स्थायी नुकसान की संभावना कम होती है, लेकिन आंखों में जलन, पानी आना, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द और सीने में जकड़न जैसे लक्षण हो सकते हैं। वायु गुणवत्ता में सुधार और प्रदूषकों से संपर्क कम होने पर ये लक्षण प्राय: खत्म हो जाते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो यह स्थिति उन लोगों से अलग है जो लंबे समय तक रिफाइनरी में काम करते हैं या आपातकालीन सेवाओं से जुड़े होते हैं, जहां कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों का जोखिम अधिक होता है। खराब वायु गुणवत्ता का असर अस्थमा या 'क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज' (सीओपीडी) से पीड़ित लोगों पर अधिक पड़ता है। ऐसे लोगों में सांस फूलने की समस्या और खांसी बढ़ सकती है, जिससे उन्हें सामान्य से अधिक दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी यह स्थिति जोखिमपूर्ण हो सकती है, क्योंकि वायु प्रदूषण हृदय-तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालता है और इससे सीने में दर्द, अनियमित धड़कन या हृदय विफलता का खतरा बढ़ सकता है। बुजुर्गों में भी प्रदूषण के प्रति संवेदनशीलता अधिक होती है, क्योंकि उनमें अक्सर पुरानी बीमारियां होती हैं और बढ़ती उम्र के साथ हृदय तथा फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है।
बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए दीर्घकालिक जोखिम अधिक हो सकता है। कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से शिशुओं में कम वजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, हालांकि एक बार के ऐसे संपर्क से जोखिम कम रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिफाइनरी से निकले धुएं से एक बार के अल्पकालिक संपर्क होने पर कैंसर का खतरा उल्लेखनीय रूप से नहीं बढ़ता। आमतौर पर रिफाइनरी उत्सर्जन से जुड़े कैंसर कई वर्षों या दशकों तक लगातार संपर्क में रहने से होते हैं। अग्निशमन या सफाई कार्य में सीधे जुड़े लोगों पर धुएं का अधिक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए उनके स्वास्थ्य की निगरानी आवश्यक मानी जाती है। धुएं से बचाव के लिए लोगों को बाहर कम समय बिताने, घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने तथा एयर कंडीशनर को रिसर्कुलेशन मोड पर चलाने की सलाह दी गई है।
अस्थमा या अन्य फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को अपनी दवाएं पास रखनी चाहिए, अपनी उपचार योजना का पालन करना चाहिए और लक्षण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से पहना गया पी2 या एन95 मास्क सूक्ष्म कणों के प्रभाव को कम कर सकता है, जबकि ढीले सर्जिकल या कपड़े के मास्क कम प्रभावी होते हैं। यदि किसी व्यक्ति के लक्षण बढ़ते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं, तो उसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए और आपात स्थिति में तुरंत आपात सेवाओं को कॉल करना चाहिए।
