Iran-Israel War : ट्रंप ने ईरान की जनता से शासन संभालने को कहा, संयुक्त अरब अमीरात और इराक ने अपना हवाई क्षेत्र किया बंद
दुबई : अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से ''अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लेने'' और 1979 से देश पर शासन कर रहे इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करने का आह्वान किया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में स्थित इजराइल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। ऐसा प्रतीत होता है कि पहला हमला ईरान सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालयों के आसपास के इलाकों में हुआ और ईरानी मीडिया ने देशभर में हमलों की खबरें दी तथा राजधानी तेहरान से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया।
यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि हमलों के समय 86 वर्षीय नेता अपने कार्यालय में मौजूद थे या नहीं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एनबीसी न्यूज से कहा कि ''जहां तक मुझे पता है'', खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन जीवित हैं। वहीं, ट्रंप ने ''बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान'' शुरू होने की घोषणा करते हुए एक वीडियो के माध्यम से ईरान के लोगों से कहा, ''जब हम अपना काम पूरा कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्ज़ा कर लेना। वह तुम्हारी होगी जिसकी बागडोर तुम अपने हाथ में ले सकोगे। संभवतः आने वाली कई पीढ़ियों में यह तुम्हारे पास एकमात्र मौका होगा। कई वर्षों से आप अमेरिका से मदद मांगते रहे हैं, लेकिन आपको कभी मदद नहीं मिली।'' इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस व्यापक लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा, ''हमारा संयुक्त अभियान बहादुर ईरानी लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियां पैदा करेगा, जिससे वे अपने भविष्य का फैसला खुद अपने हाथों में ले सकें।'' इन हमलों ने ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप के एक चौंकाने वाले नए अध्याय की शुरुआत कर दी और यह आठ महीनों के भीतर दूसरी बार है जब ट्रंप प्रशासन ने इस्लामी गणराज्य के खिलाफ सैन्य बल का इस्तेमाल किया है।
अमेरिका के एक अधिकारी और हमलों के बारे में जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति के अनुसार, जिन लोगों को निशाना बनाया गया था उनमें ईरान के नेतृत्व के सदस्य शामिल हैं। इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिली कि शीर्ष अधिकारी मारे गए हैं या नहीं। ये हमले ऐसे समय में हुए जब हाल के हफ्तों में तनाव काफी बढ़ गया था। अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में तैनात किए जा चुके थे और ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए एक समझौता चाहते हैं। यह उस समय हो रहा है जब देश के भीतर भी हालात चुनौतीपूर्ण हैं और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है।
शनिवार के हमलों का तात्कालिक कारण परमाणु वार्ता का नवीनतम दौर विफल होना प्रतीत होता है। लेकिन ये हमले क्षेत्र भर में हुए नाटकीय परिवर्तनों को भी दर्शाते हैं, जिन्होंने ईरान के नेतृत्व को लगभग आधी सदी पहले हुई इस्लामी क्रांति के बाद से सबसे कमजोर स्थिति में ला खड़ा किया है। पिछले साल जून में इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों ने ईरान की हवाई सुरक्षा, सैन्य नेतृत्व और परमाणु कार्यक्रम को काफी कमजोर कर दिया था। सात अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा इजराइल पर किए गए हमले के परिणामस्वरूप शुरू हुए क्षेत्रीय युद्ध ने पश्चिम एशिया में ईरान के परोक्ष नेटवर्क को काफी कमजोर कर दिया है। वहीं, अमेरिकी प्रतिबंधों और वैश्विक अलगाव ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। हमलों के जवाब में ईरान ने वैसी ही प्रतिक्रिया दी, जैसी वह कई महीनों से देने की धमकी दे रहा था। सबसे पहले उसने इजराइल को निशाना बनाते हुए मिसाइलों और ड्रोन की एक श्रृंखला दागी। इसके बाद उसने बहरीन, कुवैत और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात और इराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी पर हुए हमले में ईरानी मिसाइल के नुकीले छर्रे से एक व्यक्ति की मौत हो गई। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि देश अपनी प्रतिक्रिया देने में ''जरा भी हिचकिचाएगा नहीं।'' मंत्रालय ने 'एक्स' पर जारी एक बयान में कहा, ''अब मातृभूमि की रक्षा करने और दुश्मन के सैन्य हमले का सामना करने का समय आ गया है।'' सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, हवाई हमलों में एक बालिका विद्यालय में कम से कम 57 लोग मारे गए। यह हमला ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के मीनाब शहर में हुआ जहां ईरान के अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी' गार्ड का एक अड्डा है। इस हमले में कम से कम 45 अन्य लोग घायल भी हुए हैं। स्कूल पर हमले की खबर के बारे में टिप्पणी के अनुरोध पर व्हाइट हाउस और इजराइली सेना ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। संघर्ष की भयावहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार दोपहर को पश्चिम एशिया में उड़ानें बाधित हुईं और शनिवार दोपहर संयुक्त अरब अमीरात की वाणिज्यिक राजधानी दुबई में हवाई रक्षा बलों ने भारी गोलाबारी की।
एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों ने एक इंटरसेप्टर से विस्फोट के बाद के प्रभावों को देखा। सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लगातार विकसित करता रहा है और ऐसी मिसाइलें बनाने की योजना बना रहा है जो अमेरिका तक पहुंच सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष में अमेरिकी हताहत हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा, ''युद्ध में अक्सर ऐसा होता है।'' ट्रंप ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से हथियार डालने का आह्वान किया और आश्वासन दिया कि सदस्यों को सुरक्षा दी जाएगी, साथ ही चेतावनी दी कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें ''निश्चित मौत'' का सामना करना पड़ेगा। ईरानी मीडिया ने देशभर में हमलों की खबरें दीं। तेहरान के मध्य क्षेत्र में स्थित खामेनेई के परिसर की ओर जाने वाली सड़कों को अधिकारियों ने बंद कर दिया, जबकि राजधानी के विभिन्न हिस्सों में विस्फोटों की आवाज़ें भी सुनाई देती रहीं।
तेहरान में प्रत्यदर्शियों ने खामेनेई के कार्यालय के पास पहला धमाका सुना। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बाद में विस्फोट की रिपोर्ट दी, लेकिन इसका कारण नहीं बताया। खामेनेई हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आए हैं। माना जाता है कि उन्हें जून में 12 दिन तक चले युद्ध के दौरान तेहरान स्थित उनके घर से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। अभियान के बारे में जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि इजराइली अभियान में ईरान की सेना, सरकारी भवनों और खुफिया ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल को निशाना बनाते हुए ''पहले दौर'' के ड्रोन और मिसाइल दागीं। इस बीच, बहरीन ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को मिसाइल से निशाना बनाया गया। सऊदी अरब ने एक घोषणा में कहा कि ईरान ने उसकी राजधानी और पूर्वी क्षेत्र को निशाना बनाकर हमला किया, जिसे नाकाम कर दिया गया। कुवैत में प्रत्यक्षदर्शियों ने सायरन और विस्फोटों की आवाजें सुनीं। कतर में भी विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। कुवैत में अमेरिकी सेना का केंद्र स्थित है।
इराक और संयुक्त अरब अमीरात ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, और जॉर्डन में सायरन बजने लगे। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ईरान के समर्थन में समुद्री मार्गों और इजराइल पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले फिर से शुरू करने का फैसला किया है। हूती विद्रोहियों के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने यह बात नाम उजागर न करने की शर्त पर कही क्योंकि हूती नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। कतर, संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल में अमेरिकी दूतावासों या वाणिज्य दूतावासों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि उन्होंने कर्मचारियों को अपने घरों में ही सुरक्षित रहने के लिए कहा है और सभी अमेरिकियों को ''अगले आदेश तक ऐसा ही करने'' की सलाह दी है। इजराइल ने कहा कि इस 'ऑपरेशन' की योजना इजराइली और अमेरिकी सेनाओं के बीच महीनों से बनाई जा रही थी। इस बीच, नेपाल ने पश्चिम एशियाई देशों में रहने वाले अपने नागरिकों से ''सतर्क रहने, सावधानी बरतने और समुदाय के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने'' को कहा। इसने यह भी कहा कि वह क्षेत्र में बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। वहीं, श्रीलंका ने कहा कि उसने आपातकालीन हॉटलाइन स्थापित की हैं और वह युद्ध स्थिति के मद्देनजर पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थित अपने दूतावासों के साथ लगातार संपर्क में है। पश्चिम एशिया में ''सैन्य तनाव बढ़ने'' की निंदा करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने शनिवार को चेतावनी दी कि यदि तुरंत शत्रुता समाप्त नहीं की गई और तनाव कम नहीं किया गया तो इससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा है, जिसके नागरिकों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर परिणाम होंगे।
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