लखनऊ : सिंगापुर-जापान दौरे में सीएम योगी की सक्रियता, 1.5 लाख करोड़ के एमओयू पर बनी सहमति
लखनऊ, अमृत विचार : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हालिया सिंगापुर और जापान दौरा केवल औपचारिक विदेश यात्रा नहीं, बल्कि निवेश और विकास के स्पष्ट एजेंडे के साथ किया गया अभियान रहा। चार दिवसीय दौरे में मुख्यमंत्री ने उद्यमियों, औद्योगिक समूहों और भारतीय प्रवासियों से लगातार मुलाकात कर उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत किया। सरकार के अनुसार इस दौरे के दौरान करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये के एमओयू और लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी।
समयांतर की चुनौतियों और लंबी हवाई यात्राओं के बावजूद मुख्यमंत्री योगी का कार्यक्रम लगातार व्यस्त रहा। सिंगापुर पहुंचने के कुछ घंटों के भीतर ही उन्होंने भारतीय राजनयिक अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों से बैठकें शुरू कर दीं। दो दिनों तक औद्योगिक इकाइयों के भ्रमण, निवेशकों से संवाद और रोड शो जैसे कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद वह टोक्यो के लिए रवाना हुए। इस दौरान कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, किसी दर्शनीय स्थल का भ्रमण नहीं, बस मिनट टू मिनट बैठकें, लगातार बैठकों, उद्योगिक दौरों और प्रतिनिधिमंडलों से संवाद के बीच मुख्यमंत्री ने समय का अधिकतम उपयोग किया। अधिकारियों के अनुसार दौरे में औपचारिक कार्यक्रमों की बजाय निवेश-केंद्रित बैठकों पर फोकस रखा गया।
सरकार का दावा है कि इन प्रस्तावित निवेशों से प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और औद्योगिक आधार मजबूत होगा। निवेशकों ने एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, बेहतर कानून-व्यवस्था और सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली को सकारात्मक संकेतक बताया।
निवेश बढ़ाने का एजेंडा स्पष्ट
जापान में भी उन्होंने प्रमुख औद्योगिक कंपनियों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद बैठकें शुरू हो गईं। वहां भी दो दिन तक निवेश आकर्षित करने पर केंद्रित कार्यक्रम चले। अधिकारियों का कहना है कि हर बैठक का एजेंडा स्पष्ट था और प्राथमिकता उत्तर प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश बढ़ाने पर रही।
औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी नई गति
प्रदेश सरकार इसे उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। यदि प्रस्तावित निवेश धरातल पर उतरते हैं तो पूर्वांचल से बुंदेलखंड तक औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। सरकार का मानना है कि यह दौरा वैश्विक स्तर पर उत्तर प्रदेश की बदलती छवि और निवेश-अनुकूल वातावरण का संकेत है।
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