काशी : महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर खेली गई चिता भस्म की होली
वाराणसी : धार्मिक नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के ठीक अगले दिन शनिवार को महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली खेली गई। जलती चिताओं के बीच जमकर अबीर-गुलाल उड़े और भस्म से होली की गई। पूरा श्मशान घाट डमरूओं और हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा।
इस अनोखे उत्सव को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। घाट पर चल रहे निर्माण कार्यों और उमड़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। विश्वनाथ धाम, ललिता घाट और आसपास की गलियों में पुलिस बल तैनात किया गया था। केवल आयोजकों, साधु-संतों और मीडिया प्रतिनिधियों को ही होली स्थल तक जाने की अनुमति दी गई। आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों को रोका गया, जिससे कई लोग मायूस होकर लौट गए।
बाबा महाश्मशान नाथ मंदिर के व्यवस्थापक एवं आयोजक गुलशन कपूर ने बताया कि फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि पर मणिकर्णिका घाट पर यह परंपरा निभाई जाती है। दोपहर में मसाननाथ बाबा की आरती के बाद उन्हें भस्म अर्पित कर होली खेली जाती है। कई भक्त बाबा से मन्नतें मांगते हैं और उन्हें मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। आयोजक के अनुसार, यह दिव्य उत्सव बाबा की इच्छा से ही संपन्न होता है। जलती चिताओं के समक्ष खेली जाने वाली यह होली अद्भुत और विहंगम दृश्य प्रस्तुत करती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आकर्षित होते हैं।
मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन बाबा काशीवासियों और भक्तों के साथ होली खेलते हैं, जिसमें भूत-प्रेत या पिशाच शामिल नहीं होते। लेकिन एकादशी के दूसरे दिन वे अपने गणों के साथ महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली खेलते हैं। पिछले कई वर्षों में इसकी लोकप्रियता बढ़ने से भीड़ प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो गया था। इस बार निर्माण कार्यों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने रस्सी और बैरिकेडिंग लगाकर लोगों को नियंत्रित किया तथा किसी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के विशेष प्रबंध किए गये थे।
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