बरेली: सहूलियतों की थीं उम्मीदें, सालभर मिलीं सिर्फ मुश्किलें
अमृत विचार, बरेली। वर्ष 2019 से निर्माणाधीन परियोजनाएं वर्ष 2020 में धरातल पर उतर आएंगी, दो ओवरब्रिज, हवाई उड़ान, कचरे से उठती दुर्गंध से निजात से लेकर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगने से मिलने वाली सहूलियतों की उम्मीदें लेकर सालभर लोग यही चर्चा करते रहे कि शहर में बहुत कुछ बदलने वाला है लेकिन वर्ष 2020 …
अमृत विचार, बरेली। वर्ष 2019 से निर्माणाधीन परियोजनाएं वर्ष 2020 में धरातल पर उतर आएंगी, दो ओवरब्रिज, हवाई उड़ान, कचरे से उठती दुर्गंध से निजात से लेकर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगने से मिलने वाली सहूलियतों की उम्मीदें लेकर सालभर लोग यही चर्चा करते रहे कि शहर में बहुत कुछ बदलने वाला है लेकिन वर्ष 2020 में लोगों को सहूलियतें कम और मुश्किलें ज्यादा मिलीं।
न सेटेलाइट पुल चालू हुआ और न लालफाटक ओवरब्रिज को पूरा कराने के लिए एनओसी मिली जबकि सेटेलाइट पुल तैयार है लेकिन अधिकारियों की अनदेखी से बिजली की लाइन शिफ्ट नहीं हुई। इससे पुल शुरू होने में पेच फंसा है। सेना की भूमि पर लालफाटक पुल के निर्माण को एनओसी लेने के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अधिकारियों के बीच चर्चा छिड़ी रही लेकिन एनओसी के इंतजार में यह साल भी गुजर गया।
लालफाटक की एनओसी के लिए केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, सांसद धर्मेंद्र कश्यप दो बार रक्षा मंत्री से भी मिले। जिलाधिकारी नितीश कुमार ने भी फोन पर रक्षा मंत्री से बात की लेकिन एनओसी का मसला फिर भी हल नहीं हुआ। लालफाटक पुल वर्ष 2017 से बन रहा है। इससे इस क्षेत्र के लोगों का जीवन मुश्किलों से भर गया है। इसका शहर पर भी प्रभाव पड़ रहा है। लालफाटक पुल शुरू न होने, चौपुला चौराहे पर 75 दिनों का ब्लॉक लेने की वजह से शहर में ट्रैफिक की समस्या और गहरा गई है। शहर जाम के झाम से जूझ रहा है।
न सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट न एसटीपी बने
फरीदपुर के सथरापुर गांव में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए करीब 10.422 हेक्टेयर भूमि खरीदी गयी है। कई करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन प्लांट तक आने-जाने के लिए रास्ता बनाने को भूमि खरीदने पर सहमति नहीं बनने से प्लांट का निर्माण भी फंसा है जबकि इस प्लांट का बनना शहर के लिए बहुत जरूरी है। इसके बनने से शहर में जहां-तहां कूड़े के ढेर नजर नहीं आएंगे। वहीं, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन चयनित करने में ही वर्ष 2020 गुजार दिया। दो माह पूर्व ही जमीन चयनित हुई लेकिन एसटीपी निर्माण के लिए एक भी ईंट नहीं लगी है। दो साल से एसटीपी बनाने को लेकर बरेली से लेकर लखनऊ तक चर्चा छिड़ी है।
सेटेलाइट, लालफाटक और चौपुला एक नजर में
कोविड काल में बरेली-शाहजहांपुर मार्ग स्थित सेटेलाइट चौराहे पर उपरिगामी पुल निर्माण बहुत तेजी से कराया गया। 3651 लाख की लागत से पुल तैयार हुआ है। रंग-रोगन भी करा लिया गया है। लालफाटक पर 980 मीटर लंबा पुल 2017 में स्वीकृत हुआ। 84 करोड़ रुपये की लागत से पुल बन रहा है। चौपुला चौराहे पर 64 करोड़ रुपये की लागत से पुल बन रहा है। तीनों पुल वर्ष 2020 में पूरे नहीं हुए।
सिविल एन्क्लेव से शुरू नहीं हुई उड़ान
10 मार्च, 2019 को मुड़िया अहमद नगर के पास सिविल एन्क्लेव का उद्घाटन हुआ था। करीब 70 करोड़ रुपये खर्च कर दो टर्मिनल बनाए गए हैं। बड़े टर्मिनल में कुछ काम शेष बचा है। हवाई उड़ान शुरू कराने के लिए इस वर्ष तीन तारीखें लगीं लेकिन हवाई उड़ान शुरू नहीं हुई।
