वैज्ञानिक फैक्ट:गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती हीलियम
हीलियम प्रकृति का एक अत्यंत रोचक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तत्व है। सामान्य परिस्थितियों में यह एक हल्की और निष्क्रिय गैस के रूप में जानी जाती है, लेकिन अत्यधिक कम तापमान पर इसके गुण आश्चर्यजनक रूप से बदल जाते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चला है कि जब तरल हीलियम को उसके क्वथनांक, लगभग –460 डिग्री फारेनहाइट (लगभग –268.9 डिग्री सेल्सियस) से कुछ ही डिग्री कम तापमान तक ठंडा किया जाता है, तो यह एक विशेष अवस्था में पहुंच जाता है जिसे अतितरल (Superfluid) कहा जाता है।
अतितरल अवस्था में हीलियम का व्यवहार सामान्य द्रवों से बिल्कुल अलग हो जाता है। इस अवस्था में वह बिना किसी घर्षण के प्रवाहित हो सकता है। यही कारण है कि यह किसी पात्र में डाले जाने पर केवल नीचे नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे गिलास या बर्तन की भीतरी दीवारों पर चढ़कर ऊपर की ओर बढ़ने लगता है और किनारों से बाहर बह भी सकता है। देखने वाले को ऐसा लगता है मानो यह गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध कार्य कर रहा हो। इसके अतिरिक्त अतितरल हीलियम की एक और अद्भुत विशेषता यह है कि वह अत्यंत सूक्ष्म दरारों या अणु-आकार की पतली जगहों से भी रिस सकता है। सामान्य द्रव जिन दरारों से नहीं गुजर पाते, हीलियम उनसे आसानी से निकल जाता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में इसे संभालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इन अद्भुत गुणों के कारण हीलियम का उपयोग अत्यंत निम्न तापमान वाले वैज्ञानिक प्रयोगों, क्वांटम भौतिकी के अध्ययन और शक्तिशाली चुंबकों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। हीलियम के बारे में एक और रोचक तथ्य यह है कि यह ब्रह्मांड में हाइड्रोजन के बाद दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला तत्व है। सूर्य और अन्य तारों में इसकी बड़ी मात्रा मौजूद है। पृथ्वी पर भी यह प्राकृतिक गैस के कुछ स्रोतों में पाया जाता है और इसका उपयोग गुब्बारों, मौसम संबंधी उपकरणों तथा विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों में किया जाता है।
हालांकि हीलियम को आमतौर पर सुरक्षित गैस माना जाता है, फिर भी इसका अनुचित उपयोग खतरनाक हो सकता है। ‘इंजरी प्रिवेंशन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति हीलियम को सीधे गुब्बारे से अंदर खींचता है, तो यह शरीर के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। ऐसा करने पर कुछ क्षणों के लिए आवाज़ तीखी और पतली हो जाती है, क्योंकि हीलियम हवा की तुलना में हल्की होती है और ध्वनि की गति को बदल देती है। लेकिन यह मज़ाक कभी-कभी जोखिम भरा भी हो सकता है, क्योंकि हीलियम ऑक्सीजन की जगह ले सकती है और इससे सांस लेने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए, भले ही जन्मदिन की पार्टी में हीलियम भरे गुब्बारों से आवाज़ बदलकर सुनना लोगों को मनोरंजक लगे, फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से उनसे दूरी बनाए रखना ही समझदारी है। हीलियम का वास्तविक महत्व उसके वैज्ञानिक गुणों और प्रयोगों में है, जो हमें प्रकृति के अद्भुत रहस्यों को समझने में मदद करते हैं।
