Bareilly:आ रहे सीएम...पीलीभीत बाईपास पर नहीं लगेंगे झटके

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। पीलीभीत बाईपास पर डोहरा मोड़ से बैरियर टू चौकी के बीच का सफर अब तक किसी मुसीबत से कम नहीं था, लेकिन अब वाहन चालकों को जानलेवा झटकों से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। पिछले दो सालों से इस मार्ग पर सीवर लाइन के ''''डिप'''' (ढक्कन) या तो सड़क की सतह से गहरे धंसे थे या खतरनाक ढंग से ऊपर उभरे हुए थे। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत बिछाई गई इस सीवर लाइन के घटिया फिनिशिंग वर्क ने इस मुख्य मार्ग को ''''एक्सीडेंट जोन'''' में तब्दील कर दिया था।

राहगीरों की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन था और दोपहिया वाहन चालक इन असंतुलित ढक्कनों की वजह से गिरकर लगातार चोटिल हो रहे थे। पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन से लेकर वर्तमान अधिशासी अभियंता तक ने जल निगम ग्रामीण की एक्सईएन को दर्जनों बार पत्र लिखकर सड़क और डिप को दुरुस्त करने का अनुरोध किया, लेकिन हर बार इन पत्रों को कूड़ेदान के हवाले कर दिया गया। अब मुख्यमंत्री के संभावित बरेली दौरे की आहट ने सो रहे सिस्टम को जगा दिया है। शासन स्तर से होने वाली समीक्षा और किसी भी संभावित फटकार से बचने के लिए जल निगम ने आनन-फानन में काम शुरू कर दिया है। इसे विभाग की कार्यशैली कहें या ''''वीआईपी कल्चर'''' का दबाव, जो काम महीनों से अटका था, वह अब युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है।

नमामि गंगे के नाम पर घटिया निर्माण की भेंट चढ़ी सड़क
दरअसल, तीन साल पहले हरुनगला में नकटिया नदी किनारे एसटीपी के निर्माण के साथ इस मार्ग पर सीवर लाइन डाली गई थी। जल निगम ग्रामीण ने पाइप लाइन डालने के बाद आनन-फानन में सड़क तो बना दी, लेकिन गुणवत्ता के मानकों को ताक पर रख दिया। नतीजा यह हुआ कि सड़क बनने के कुछ महीनों बाद ही जगह-जगह से धंसने लगी। सड़क इतनी घटिया बनाई गई थी कि पीडब्ल्यूडी को अपनी साख बचाने के लिए कई बार खुद के बजट से गड्ढे भरवाने पड़े। सीवर लाइन के ऊंचे-नीचे चेंबर शुरू से ही वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए थे, लेकिन तकनीकी खामियों को सुधारने के बजाय विभाग गहरी नींद में सोया रहा। गुरुवार को डिपो का सही कराने के बार राहत की उम्मीद जागी है।

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