निरंकारी संत समागम में उमड़े श्रद्धालु, सतगुरु माता ने कहा- अपना स्वभाव बिच्छू जैसा नहीं, तितली जैसा सुंदर बनाएं

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। प्रादेशिक निरंकारी संत समागम के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने मानवता और आध्यात्मिक परिवर्तन के उपदेश में कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं के स्वभाव में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रक्रिया है। अपने प्रवचनों में उन्होंने प्रकृति व जीवन के उदाहरण से जीवन दर्शन समझाया।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक इल्ली कायाकल्प की प्रक्रिया से गुजरकर एक सुंदर तितली का रूप धारण करती है, वैसे ही मनुष्य को सत्संग और ब्रह्मज्ञान के माध्यम से अपने जीवन को श्रेष्ठ और सुंदर बनाना चाहिए। वहीँ दूसरी ओर, उन्होंने सचेत किया कि मनुष्य को बिच्छू की तरह डसने वाला या दूसरों को कष्ट देने वाला स्वभाव नहीं रखना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया कि मनुष्य के कर्म दिखावे से मुक्त, सच्चाई और नेकी वाले होने चाहिए।

समागम में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा हमारे विचारों और भावनाओं के माध्यम से प्रकट होते हैं। जीवन व्यक्तिगत सुखों के लिए नहीं है। उन्होंने दया, करुणा, विनम्रता और सहनशीलता जैसे मानवीय गुणों को आत्मसात करने पर जोर दिया। औद्योगिक नगरी कानपुर का रेलवे ग्राउंड (पराग डेयरी) रविवार को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।

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अवसर था उत्तर प्रदेश प्रादेशिक निरंकारी संत समागम का, जहां सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और राजपिता की गरिमामयी उपस्थिति में हजारों श्रद्धालुओं ने मानवता, प्रेम और एकत्व का पाठ पढ़ा। अनुशासन और स्वच्छता से सजी इस टेंट नगरी में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के भक्तों का संगम देखने को मिला। दोपहर 12:44 पर सतगुरु माता कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। उनकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु कतार में खड़े हो गए। कार्यक्रम स्थल पर दो तरह की लाइन की व्यवस्था थी। जिसमें पंडाल में बैठकर सत्संग सुनने के लिए और दूसरी नमस्कार लाइन जो सतगुरु माता व राजपिता का आशीर्वाद लेने के लिए थी। 

आध्यात्मिकता और युवा शक्ति का संगम:

समागम का आकर्षण केवल प्रवचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंकारी यूथ फोरम ने खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन कराया। क्रिकेट, फुटबॉल और वॉलीबॉल जैसे खेलों के माध्यम से टीम भावना और अनुशासन का संदेश दिया गया। वहीं, निरंकारी यूथ सिम्पोजियम और छह तत्व विषय पर आधारित स्किट व पैनल चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि आध्यात्मिकता केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक व्यावहारिक शैली है। इस दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना और महापौर प्रमिला पाण्डेय भी समागम में पहुंची। 

जगह-जगह प्याऊ और डिस्पेंसरी की व्यवस्था:

निराला नगर का रेलवे मैदान श्रद्धालुओं से पटा था। करीब 60 हजार से ज्यादा लोग मैदान में थे। इतनी बड़े जनसमूह को संभालने के लिए सेवादारों की पूरी फौज हर जगह व्यवस्थित की गई थी। जगह-जगह प्याऊ बनाए गए थे। 5 से ज्यादा डिस्पेंसरी, अमानती घर, पूछताछ केंद्र भी बनाए गए थे। समागम में स्टॉल भी थे जहां निरंकारी टीशर्ट, किताबें, कैलेंडर, डायरी, बैंड लोगों ने खरीदें।  समागम के समापन पर सेवा, सुमिरन और सत्संग के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं ने विदा ली। निरंकारी मिशन ने आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन आभार व्यक्त किया।

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