कानपुर : नगर आयुक्त का निर्देश बेअसर, नहीं हटा अतिक्रमण

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। नगर निगम के नगर आयुक्त अर्पित उपध्याय के निर्देश पर भी बड़ा चौराहा और सीसामऊ-पीरोड पर स्थायी तो दूर की बात है, अस्थायी अतिक्रमण तक हट नहीं सका। यहां पर नगर आयुक्त के निरीक्षण के बाद भी स्थिति जस के तस बनी हुई है। जबकि नगर आयुक्त ने दो दिन में अभियान चलाकर शहर के दोनों प्रमुख मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश संबंधित मुख्य अभियंता व जोनल अधिकारी को दिए थे, जो बेअसर साबित होता दिख रहा है। 

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने 11 मार्च को 80 फिट रोड होते हुए भदौरिया चौराहा से लेनिन पार्क तक और जरीबचौकी पीरोड होते हुए गोपाल सिनेमा, सीसामऊ बाजार के अंदर वनखण्डेश्वर मंदिर चौराहे तक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के समय उनको दोनों ही मार्गों पर न सिर्फ अस्थायी, बल्कि स्थायी अतिक्रमण भी कई जगहों पर मिले थे। फुटपाथ होने के बावजूद अतिक्रमण की वजह से वह नजर तक नहीं आ रहे थे। फुटपाथ पर दीवारें तक बनी मिली। 

तब नगर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त करते हुए जोनल अधिकारी व जोनल अभियन्ता-4 को निर्देश दिया था कि दोनों अधिकारी संयुक्त रूप से अभियान चलाकर फुटपाथ पर अस्थायी व स्थायी अतिक्रमण को ध्वस्त करने की कार्यवाही करे और यूजर चार्ज की वसूलें। सप्ताह में दो दिन इन मार्ग पर प्रत्येक दशा में सघन निरीक्षण करते हुए अतिक्रमण हटाये।

वहीं, सीसामऊ मार्ग को पूरी तरह से अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए निरंतर अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, लेकिन नगर आयुक्त का यह निर्देश बेअसर ही साबित हुआ, क्योंकि दोनों ही मार्गों पर निरीक्षण के पांच दिन बीतने के बाद भी अतिक्रमण हटाया नहीं गया और न ही अतिक्रमण हटाने का कोई प्रयास जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा किया गया। 

मानो जैसे अधिकारियों व अतिक्रमणकारियों के बीच कोई सेटिंग हो। इसकी वजह से शायद अभियान का संचालन अभी तक नहीं हुआ। वहीं, शिवाला मार्केट के आसपास व बड़ा चौराहे के पास काफी संख्या में स्थायी व अस्थायी अतिक्रमण मिलने पर नौ मार्च को कार्यवाही की गई थी, लेकिन यहां पर स्थिति फिर से पहले जैसी ही हो गई। जोनल अधिकारी -4 राजेश सिंह के मुताबिक जल्द ही अभियान का संचालन किया जाएगा। रूपरेखा तैयार कर ली गई है। 

अतिक्रमण की गिरफ्त में है शहर के कई क्षेत्र 

शहर के कई क्षेत्र वर्तमान में अतिक्रमण से जकड़ा हुए है। औपचारिकता के तौर पर अतिक्रमण अभियान का संचालन तो कर दिया जाता है, लेकिन उसके अगले दिन फिर से ही उन्हीं जगहों पर अतिक्रमण कर लिया जाता है। खास बात तो ये है कि अभियान चलाने के बाद अधिकारी भी उन जगहों पर दोबारा देखरेख के लिए नहीं जाते हैं। 

अगर उस मार्ग से निकलते भी है तो अतिक्रमण को देखकर मुंह फेर लेते हैं। प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण की वजह से सड़क की चौड़ाई तक हो जाती है और फुटपाथ तो लापता हो जाते हैं। ऐसे में फिर शहरवासियों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। कई बार तो जाम में जनप्रतिनिधियों भी आवागमन के दौरान फंस जाते है।

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