बरेली: जिला महिला अस्पताल में वसूली का खेल, गार्ड से लेकर नर्स तक शामिल

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अमृत विचार, बरेली। केंद्र व प्रदेश सरकार गरीबों को मुफ्त और बेहतर इलाज मुहैया कराने के दावे कर रही है। हर माह स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की सांठगांठ से दूर-दराज से जिला महिला अस्पताल में बेहतर इलाज की उम्मीद में पहुंचने वाले गरीबों से …

अमृत विचार, बरेली। केंद्र व प्रदेश सरकार गरीबों को मुफ्त और बेहतर इलाज मुहैया कराने के दावे कर रही है। हर माह स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की सांठगांठ से दूर-दराज से जिला महिला अस्पताल में बेहतर इलाज की उम्मीद में पहुंचने वाले गरीबों से अवैध वसूली का खेल खुलेआम चल रहा है। इसे लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायतें भी हुईं लेकिन स्थिति जस की तस है। मामला जिला महिला अस्पताल में स्थित एसएनसीयू का है। यहां अव्यवस्थाएं पूरी तरह से हावी हैं। नवजात बच्चों के परिजनों से अच्छे इलाज के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है।

वसूली के इस गिरोह में स्टाफ नर्स और गार्ड की मिलीभगत सामने आ रही है। दबी जुबान से विभाग के कुछ अफसर भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं लेकिन स्टाफ कम होने की बात कहकर कार्रवाई से बच रहे हैं। बताया जाता है एसएनसीयू में जिलेभर से गंभीर नवजात बच्चे भर्ती होते हैं। पिछले कुछ माह से यहां भर्ती होने वाले बच्चों के परिजनों को पहले बच्चे की गंभीर स्थिति को लेकर डराया जाता है। फिर बेहतर इलाज की दुहाई देकर पैसों की वसूली की जाती है। यह राशि हजारों में होती है लेकिन परिजन जैसे पट जाए उस पर ही राजी हो जाते हैं।

ये लोग वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चे के परिजनों की आर्थिक स्थिति का पता लगाने के बाद उनसे पैसों की वसूली की पूरी प्लानिंग तैयार करते हैं। गार्ड बच्चों के परिजनों से बात करता है। इसके बाद स्टाफ नर्स के माध्यम से डॉक्टर तक पैसा पहुंचता है। बच्चों को अच्छा इलाज मिल जाए इस डर से परिजन शिकायत के लिए भी सामने नहीं आते हैं। परिजनों को डर है कि शिकायत की गई तो उनके बच्चों का इलाज ठीक नहीं होगा। पिछले सप्ताह ही एसएनसीयू में तीन बच्चों की मौत हुई थी जिसके डर से परिजन इलाज के लिए पैसा दे रहे हैं।

रेफर के नाम भी पर करते हैं वसूली

जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की सुस्ती का आलम यह है कि एसएनसीयू में रेफर करने के नाम पर भी पैसा वसूल किया जा रहा है। नवजात बच्चों को रेफर करने के पीछे भी बाकायदा परिजनों को पूरी कहानी बताई जाती है। परिजनों को बताया जाता है कि यहां एक वार्मर में दो बच्चे रखे हुए हैं जिससे संक्रमण पैदा हो सकता है। हमारी डॉक्टरों से अच्छी पहचान है। वहां बेहतर इलाज की व्यवस्था हो जाएगी।

डाक्टर की चाय पर एक हजार रुपये जुर्माना

पिछले सप्ताह एसएनसीयू में भर्ती एक नवजात के परिजनों से स्टाफ नर्स ने चाय के नाम पर पैसे मांगे। कहा कि डाक्टर राउंड पर अभी-अभी आए हैं। ठंड बहुत है। युवक अस्पताल परिसर में चाय लेने गया तो दुकान बंद मिली। इस पर स्टाफ नर्स के कहने पर वह 20 रुपये की चाय लेने अय्यूब खां चौराहे पहुंचा। इस दौरान बिना हेलमेट उसका एक हजार रुपये का चालान कर दिया गया। यह मामला इन दिनों भी महिला अस्पताल में चर्चा का विषय बना है।

सीसीटीवी नाम के, चप्पल-जूते भी खूब चोरी हो रहे

कहने को एसएनसीयू वार्ड के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं मगर यह सिर्फ शो-पीस बनकर रह गया है। यहां तीमारदारों के अलावा स्टाफ की चप्पल व जूते कई बार चोरी हो चुके हैं। पिछले सप्ताह ही यूनिवर्सिटी के पास रहने वाली एक युवती एसएनसीयू में भर्ती एक बच्चे को देखने पहुंची थी। इस दौरान उसकी चप्पल चोरी हो गई। इसके अलावा स्टाफ कर्मी के जूते चोरी होने की बात भी सामने आई है।

एसएनसीयू वार्ड में हो रही वसूली को लेकर अभी तक किसी ने लिखित शिकायत नहीं की। शिकायत मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – डा. अलका शर्मा, सीएमएस, महिला जिला अस्पताल

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