रेल दुर्घटनाओं पर लगेगी ब्रेक : वंदेभारत, चौरीचौरा समेत कई ट्रेनों का स्वदेशी कवच पर परीक्षण सफल
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर से प्रयागराज के मध्य मलवां स्टेशन के पास कालका मेल की दुर्घटना कोई कभी कैसे भूल सकता है, इस ट्रेन दुर्घटना में कई यात्रियों की जान चली गई थी लेकिन अब इन्हीं दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने कानपुर से प्रयागराज के मध्य मानवीय त्रुटियों को रोकने के लिए स्वदेशी कवच लगा दिया गया है जो एक सप्ताह के अंदर करने लगेगा।
उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व और प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर सत्येंद्र कुमार के तकनीकी मार्गदर्शन में ये उपलब्धि हासिल की गई है। प्रयागराज-कानपुर खंड पर उत्तर मध्य रेलवे द्वारा की जा रही स्वदेशी कवच प्रणाली स्थापित रेल संरक्षा को सुदृढ़ करने और "मेक इन इंडिया" पहल को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

आगामी सप्ताह के भीतर प्रयागराज और कानपुर (दोनो स्टेशन छोड़ कर)के बीच 190 रूट किलोमीटर के खंड पर स्वदेशी रूप से विकसित 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली को चालू करने जा रही है। यह कार्यान्वयन भारतीय रेलवे आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को समाप्त करना और इस व्यस्त रेल खंड पर परिचालन दक्षता को बढ़ाना है।
पहले रेल अधिकारी सिस्टम से संतुष्ट हुए
इस प्रणाली को चालू करने का निर्णय व्यापक तकनीकी और फील्ड परीक्षणों के बाद लिया गया है, जिसमें सिस्टम की पूर्ण विश्वसनीयता सुनिश्चित की गई है। परीक्षण चरण के दौरान 8, 16 और 22 एलएचबी कोच वाले डब्लूएपी-7 लोकोमोटिव के साथ विभिन्न कम्पोजीशन वाले रेकों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त, उच्च गति पर प्रदर्शन को परखने के लिए 20-कोच वाली वंदे भारत रेक का भी गहन परीक्षण किया गया। इस प्रणाली का यात्री संरक्षा के दृष्टिकोण से, चौरी चौरा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 15003/15004) सहित विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से 20,000 किलोमीटर से अधिक का पैसेंजर ट्रायल पूरा किया जा चुका है।
