Bareilly: नगर निगम ने यूपीआई से टैक्स वसूली में तोड़ा रिकॉर्ड, खजाने में बरसे 100 करोड़ 

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Published By Monis Khan
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महिपाल गंगवार, बरेली। यूपी के स्मार्ट शहरों में शुमार बरेलीवासियों ने इस बार नगर निगम के खजाने को भरने में न केवल तत्परता दिखाई है, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को धरातल पर उतारने में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20 मार्च तक वसूली का आंकड़ा 100.40 करोड़ के पार पहुंच गया है।

विभाग से मिले आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाला और सुखद पहलू डिजिटल भुगतान के प्रति जनता का बढ़ता रुझान है। बरेली नगर निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब डिजिटल माध्यमों से कर जमा करने वालों की संख्या पारंपरिक नकद भुगतान करने वालों से कहीं अधिक हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल 77,309 करदाताओं में से रिकॉर्ड 37,362 लोगों ने यूपीआई के माध्यम से अपना हाउस टैक्स जमा किया है। इसके अलावा 2,926 लोगों ने क्यूआर कोड स्कैन करके और 1,526 लोगों ने नेट बैंकिंग का उपयोग किया है। कार्ड और चेक के माध्यम से भी हजारों की संख्या में भुगतान प्राप्त हुए हैं।

इधर, संपत्तिकर विभाग की इस सफलता के पीछे कर निर्धारण के दायरे में आए भवनों की संख्या में हुई भारी बढ़ोतरी भी एक प्रमुख कारण है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में कर के दायरे में आने वाले भवनों की संख्या 52,072 दर्ज की गई थी, जो वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 77,309 तक पहुंच गई है। यानि लगभग 25 हजार से अधिक नए भवनों को टैक्स के जाल में शामिल किया गया है। विभाग की ओर से चलाए गए डोर-टू-डोर सर्वे और जीआईएस मैपिंग के प्रभावी क्रियान्वयन से उन संपत्तियों की पहचान की गई जो अब तक निगम के रिकॉर्ड से बाहर थीं। इन नए भवनों से प्राप्त होने वाले राजस्व ने निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है।

नकद से लेकर एनईएफटी तक, हर माध्यम से झोली में बरसा पैसा
राजस्व के विभिन्न स्रोतों की बात करें तो 20 मार्च तक शुद्ध कर मद में 71.26 करोड़ की आय हुई है, जबकि करेत्तर (नॉन-टैक्स) मद में 29.14 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। हालांकि डिजिटल माध्यमों का बोलबाला है, लेकिन पारंपरिक नकद भुगतान का भी अपना महत्व बना हुआ है। 24,829 लोगों ने काउंटर पर जाकर नकद राशि के रूप में लगभग 18.92 करोड़ रुपये जमा किए हैं। बड़े संस्थानों और फैक्ट्रियों ने आरटीजीएस और एनईएफटी का सहारा लिया। आरटीजीएस के माध्यम से 4.62 करोड़ और एनईएफटी के जरिए 3.63 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि निगम ने छोटे घरेलू करदाताओं से लेकर बड़े औद्योगिक घरानों तक अपनी पहुंच और वसूली तंत्र को सुव्यवस्थित किया है।

नगर निगम की आय में लगातार हो रही वृद्धि
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो निगम की आय में निरंतर उछाल देखने को मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल वसूली जहां 80.45 करोड़ थी, वहीं 2024-25 में बढ़कर 109.70 करोड़ हो गई थी। इस वर्ष भी 20 मार्च तक ही 100 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार करना विभाग की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि अभी वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक वसूली ग्राफ और ऊपर जाने की उम्मीद है।

आंकड़े एक नजर में
कुल करदाता (2026): 77,309

यूपीआई से भुगतान : 37,362 लोग (सबसे लोकप्रिय माध्यम)

नकद भुगतान : 24,829 लोग

कुल वसूली 100.40, करोड़ रुपये
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि नगर निगम के राजस्व में हुई रिकॉर्ड वृद्धि शहर के विकास के प्रति नागरिकों की जागरूकता को दर्शाती है। 20 मार्च तक 100 करोड़ का आंकड़ा पार करना एक बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल भुगतान, विशेषकर यूपीआई के प्रति करदाताओं का उत्साह सराहनीय है। इस राजस्व का उपयोग शहर की सड़क, सफाई और प्रकाश व्यवस्था को और बेहतर बनाने में किया जाएगा।

मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी ने बताया कि करदाताओं की सुविधा के लिए हमने ऑनलाइन और डिजिटल भुगतान के विभिन्न विकल्प दिए थे, जिन्हें जनता ने हाथों-हाथ लिया है। 31 मार्च तक हमारा लक्ष्य पिछला रिकॉर्ड तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित करना है, जो भविष्य की विकास योजनाओं के लिए बड़ा वित्तीय आधार बनेगा। बकायेदारों से अपील है कि वे समय सीमा के भीतर अपना कर जमा करें।

 

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