युद्ध का एफटीए पर असर : विदेशी खरीदारों ने बंद की बातचीत, निर्यातकों पर संकट

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Edited By Amrit Vichar
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वैश्विक बाजार पर संकट के चलते दो महीने का दिया गया समय

कानपुर, अमृत विचार। ईरान, इजराइल व अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर एफटीए ‘फ्री ट्रेड एग्रिमेंट’ पर भी पड़ रहा है। एफटीए के बाद से ही शहर के निर्यातकों की शुरू हुई विदेशी खरीदारों के बीच बातचीत फिलहाल विराम के दौर पर है। विदेशी खरीदारों ने युद्ध के चलते इसे दो से तीन महीने के लिए टाल दिया है। अब निर्यातकों का मानना है कि युद्ध का संकट खत्म होने के बाद ही एफटीए के लिए बातचीत शुरू हो सकती है।

अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ के दौरान भारत ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रिमेंट किया था। इनमे यूरोपीय यूनियन, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात व जापान जैसे देश भी शामिल रहे।  एफटीए होने के बाद से ही शहर के निर्यातक नए वैश्विक बाजार में अपने उत्पादों को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे थे। इनमें सबसे अधिक लेदर प्रोडक्ट के निर्यातक सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। माना जा रहा था कि बातचीत के दौरान ही उन लोगों को आने वाले एक साल के भीतर ऑर्डर हासिल हो सकता है। 

बावजूद इसके इस युद्ध के बीच ही निर्यातकों के साथ कई तरह की परेशानियां सामने आने लगी। सबसे बड़ी परेशानी उत्पादों को तैयार करने वाले कच्चे माल के रेट में परिवर्तन है। उधर खरीदारों को भी विदेशी बाजार की मांग के बदलने का डर सताने लगा था। इस स्थिति में लेदर प्रोडक्ट के निर्यातकों के साथ उन खरीदारों की बातचीत में फिलहाल विराम लग गया है। युद्ध के बीच बनी इस स्थिति को निर्यातक कारोबार के लिए बेहतर संकेत नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बाजार हालात बदलने पर खरीदार ऑर्डर व प्रोडक्ट भी बदल सकते हैं। जिससे उन्हें भविष्य में परेशानी उठानी पड़ सकती है। 

नए निर्यातकों पर संकट

शहर में अमेरिका में अपने उत्पाद भेज रहे नए निर्यातकों पर सबसे अधिक परेशानी आई है। पहले उनका विदेशी बाजार टैरिफ की वजह से टूटा। इसके बाद जब उन लोगों ने टैरिफ से मुकाबला करने के लिए एफटीए वाले देशों में संपर्क साधा तो वहां से भी अब उन्हें ऑर्डर पर निराशा ही हाथ लग रही है। अब नए निर्यातक बगैर उत्पादन के सिर्फ बाजार हाल को परखने का काम कर रहे हैं।

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