मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय बोले- निर्धारित शासनादेश के अनुसार ही लिया जाए परीक्षा शुल्क

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Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि परीक्षा शुल्क शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ही लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय द्वारा तय सीमा से अधिक शुल्क वसूला जाता है तो उसकी ऑडिट कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने लखनऊ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना और शासनादेशों के अनुपालन की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रहित को प्राथमिकता देते हुए निर्णय लेना चाहिए। 

शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक और बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर शुल्क तय किया गया है। 

इस दौरान योगेंद्र उपाध्याय ने विश्वविद्यालयों को शासनादेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए, ताकि संस्थान अधिक आत्मनिर्भर बन सकें। 

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