विवेक का सही उपयोग शिक्षा से ही संभव : पीपी सिंह

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Published By Deepak Mishra
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बाराबंकी, अमृत विचार। सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल के चेयरमैन पीपी सिंह ने कहा कि विवेक प्रकृति प्रदत्त गुण है और इसका सही उपयोग शिक्षा के माध्यम से ही किया जा सकता है। हमारा उद्​देश्य व्यवसाय नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण व संस्कार युक्त शिक्षा देना है ताकि संस्था में पढ़कर निकले बच्चे गुणों से परिपूर्ण हो सकें। चेयरमैन ने यह बात जयपुरिया स्कूल के बाराबंकी में दस वर्ष पूरे होने के मौके पर संस्था में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कही।

मैनेजिंग डायरेक्टर सुभाष सिंह ने कहा कि हमारी शिक्षा बच्चों में सार्वभौमिक विकास का लक्ष्य रखती है। व्यवसाय नहीं करना है बल्कि बच्चों का सुदृढ़ भविष्य गढ़ना है। प्रयास है कि बच्चों के लिए संस्कार कार्यशाला भी आयोजित की जाए ताकि बच्चों में संस्कारयुक्त होने का चलन बढ़े। इस अवसर पर विद्यालय के पिछले दस वर्षाें के कार्यकाल से संबंधित पीपीटी भी दिखाई गई।

वाइस प्रेसिडेंट अभिनव सिंह व असिस्टेंट डायरेक्टर के के सिंह ने बताया कि वर्ष 2015 में स्थापित यह विद्यालय शैक्षिक उत्कृष्टता, रचनात्मकता, नैतिक मूल्य और समग्र विकास का अनूठा संगम है। गुजरे समय में विद्यालय ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की हैं। तीरंदाजी क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर विजेता बनकर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागी के रूप में शामिल रहा।

जेईई मेंस 2026 में अयांश उत्कर्ष मौर्य ने 99.61 प्रतिशत अंक के साथ जिले में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करके स्कूल का मान बढ़ाया। इसी सत्र से प्री प्राइमरी के लिए पूर्ण वातानुकूलित ब्लाक प्रस्तावित है। इस ब्लाक में बच्चों के लिए अत्याधुनिक खेलकूद की सामग्री, आधुनिक डिजिटल स्मार्ट बोर्ड एवं रुचिकर शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। स्कूल ने भविष्य में क्रिकेट व बैडमिंटन अकादमी, स्विमिंग पुल आदि के निर्माण की योजना भी बनाई है। अंत में प्रधानाचार्या मितुषी नेगी ने आभार जताया।

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