Uttrakhand: इस मेले में कभी घोड़ा खरीदने आता था डाकू सुल्ताना, नखासा पहुंचा 10 लाख का मारवाड़ी घोड़ा
काशीपुर, अमृत विचार। काशीपुर में प्रतिवर्ष मां भगवती बाल सुंदरी देवी के मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक चैती मेले में लगने वाला नखासा बाजार अपने चरम पर है। साथ ही यह मेले के प्रमुख आकर्षण केंद्रों में से है। किंवदंती है कि इस मेले में कभी चंबल के डाकू अपनी पसंद का घोड़ा खरीदकर ले जाते थे। बताया जाता है कि चैती मेला में नखासा बाजार करीब 400 वर्ष पूर्व रामपुर निवासी घोड़ों के बड़े व्यापारी हुसैन बख्श ने शुरू किया था। मेले में इस बार हजारों से लेकर लाखों रुपये की कीमत तक के घोड़े बिक्री के लिए पहुंचे हैं।
चैती मेले में लगने वाला नखासा बाजार सैकड़ों वर्षों से लगता आ रहा है। यह बाजार चैती मेले के उद्घाटन के दिन से शुरू होकर सातवें दिन मां बाल सुंदरी देवी के चैती मंदिर में डोला आने तक लगता है। इस बाजार में घोड़ा व्यापारी पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, पंजाब आदि से घोड़े बेचने आते हैं और यहां बिक्री करके अपने घोड़े की अच्छी कीमत वसूलकर जाते हैं। इस बार भी यह बाजार अपने पूरे शबाब पर है।
काशीपुर के मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में लगने वाले इस चैती मेले में हर साल लगने वाले नखासा बाजार का अनुमान इसी से ही लगाया जा सकता है कि अपने समय का मशहूर डाकू सुल्ताना भी अपने लिए इसी नखासा बाजार से घोड़ा खरीदकर ले जाता था। इस बार काशीपुर में सबसे महंगा घोड़ा 10 लाख रुपए की कीमत का है जो काशीपुर के कुंडा क्षेत्र के ग्राम बैतवाला निवासी सरनजीत सिंह लाए हैं, जो सिर झुकाकर नमस्ते करता है।
राजस्थान से लाए घोड़े डिमांड में
खरीददार यहां घोड़ो को दौडाकर व उनके करतब देखकर सही तरीके से जांच परखकर घोड़े खरीदते हैं। इस बार इस घोड़ा बाजार में सिंधी, अरबी, मारवाड़ी तथा अवलक सहित, अमृतसरी, वल्होत्रा, नुखरा, अफगानी हर प्रजाति के घोड़े आये हैं। यहां लुधियाना व पंजाब और राजस्थान से लाए घोड़ो की काफी डिमांड खरीदार करते हैं।
कभी अच्छी नस्ल का घोड़ा 100 रुपये में मिलता था
उस समय घोड़े 5 रुपए से लेकर 50 रूपए तक और अच्छे से अच्छा घोड़ा 100 और 150 रुपये में मिल जाता था। इस बाजार में 10 से 12 नस्ल के घोड़े बिकने आते हैं। मेले के नखासा बाजार में उत्तराखंड, यूपी समेत कई प्रदेशों से लोग घोड़े खरीदने आते हैं। इस घोड़ा बाजार को 135 से 140 साल हो गए हैं। पूर्व में यह घोड़ा बाजार पूरे भारत मे अपना महत्व रखता था। यहां पूरे भारत से व्यापारी और खरीददार आते थे। यहां तक कि मेरठ, बाबूगढ़ छावनी, रानीखेत छावनी और गौशाला तक से घोड़े खरीदने आते थे।
फोटो लाइन….22केएसपी 02पी-काशीपुर के चैती मैदान में लगा नखासा बाजार।
