रामनवमी पर भक्तों में बंटेगा पंजीरी का प्रसाद: श्रीरामलला के लिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि से आया उपहार, ट्रस्ट को सौंपा वस्त्र, फल-मेवा 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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अयोध्या, अमृत विचार। श्रीराम जन्मभूमि से श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ धाम की परंपरा को एक सूत्र में जोड़ने की पहल की गई है। इसी के तहत मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के प्रबंध समिति के प्रमुख विजय बहादुर साथियों के साथ अयोध्या आए। राम जन्मोत्सव में भगवान को उपहार स्वरूप वस्त्र और भोग में साढ़े चार क्विंटल धनिया पंजीरी, मेवा, मिठाई, फल ट्रस्ट को सौंपा। रामलला का दर्शन-पूजन किया।

श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रबंध समिति के सदस्य विजय बहादुर सिंह ने बताया कि रामनवमी उत्सव को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि से विशेष कारीगरों को अयोध्या भेजा गया था। जिन्होंने यहां धनिया पंजीरी तैयार की। यह प्रसाद एक औषधि के रूप में भी होता है। आज भगवान को वस्त्र, फल व मेवा के साथ पंजीरी समर्पित की है। प्रारंभ हुई यह परंपरा आगे भी अनवरत चलती रहेगी। 

उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म स्थान को मुक्त कराए जाने की भी चर्चा करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की मुरली बज रही है, अब चक्र की आवश्यकता है। जिसका सिलसिला आरंभ हो गया है। 2020 से अब तक 25 वाद दायर किए जा चुके है। कहा कि पूरी कृष्ण जन्मभूमि का स्वामित्व समिति के पास है, लेकिन वहां पर एक कथित मस्जिद बनी हुई है। यही विवाद है, मांग है कि पूरा परिसर हमें दिया जाए जिससे वहां पर लीला पुरुषोत्तम और गीता का एक स्मारक बन सके।

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को श्रीराम और काशी विश्वनाथ को जोड़ा जाए। इसके लिए काशी भी होकर आए है। वहां पर भी प्रसाद और अन्य सामग्री भेंट की है। आज वहां की समिति के लोग अयोध्या आए है।

इन्होंने रामनवमी के अवसर पर कृष्ण जन्मोत्सव में बंटने वाले धनिया पंजीरी के प्रसाद की व्यवस्था की है। जो रामनवमी में आने वाले श्रद्धालुओं को वितरित की जाएगी। समिति के लोगों ने आज प्रभु श्रीरामलला और राम दरबार के वस्त्र, मेवा, फल मिष्ठान और धनिया पंजीरी भेंट किया है। समिति के यह नई परंपरा स्वागत योग्य है।

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